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जानें क्या है बीटिंग रिट्रीट और इसे क्यों मनाया जाता है

Mon, 28 Jan 2019 05:05 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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beating retreat - फोटो : pti
हर साल की तरह इस बार भी गणतंत्र दिवस के बाद मनाया जाने वाला बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम 29 जनवरी को रायसीना हिल्स और विजय चौक स्थल  पर आयोजित होगा। इस कार्यक्रम के होने का मतलब है गणतंत्र दिवस समारोह की औपचारिक घोषणा होती है। दरअसल 26 से लेकर 29 जनवरी के बीच विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है और सरकारी भवनों को रोशनी से जगमग किया जाता है। यह सेना के बैरक की वापसी का प्रतीक भी होता है। आज इसकी फुल ड्रेस रिहर्सल है। आइए जानें इसके बारे में सबकुछ...
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beating retreat - फोटो : pti
बीटिंग द रिट्रीट की शुरुआत तीनों सेनाओं के एक साथ मिलकर बैंड के वादन से होती है। तीनों सेनाओं के बैंड लोकप्रिय मार्चिंग धुनें बजाते हैं। ड्रमर्स अबाइड विद मी बजाते हैं वहीं ट्युबुलर घंटियों के जरिए चाइम्स बजाई जाती हैं। यह काफी दूरी पर रखा होता है जिससे बहुत शानदार दृश्य बनता है।
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beating retreat - फोटो : pti
इसके बाद रिट्रीट का बिगुल वादन होता है, जब बैंड मास्टर राष्ट्रपति के पास जाते हैं और बैंड की विदाई की अनुमति मांगते हैं।

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beating retreat - फोटो : pti
जब राष्ट्रपति की अनुमति मिल जाती है तो यह सूचित किया जाता है कि गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों का समापन समारोह पूरा हो गया है। जब बैंड वापस जाने लगते हैं तो वह 'सारे जहां से अच्छा' की लोकप्रिय धुन बजाते हैं। शाम को ठीक 6 बजे बगलर्स रिट्रीट की धुन बजाते हैं और तिरंगे को उतार लिया जाता है।
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beating retreat - फोटो : pti
तिरंगे को उतारने के बाद राष्ट्रगान बजाया जाता है और इस तरह से गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन हो जाता है।
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beating retreat - फोटो : pti
अब तक के इतिहास में दो बार रद्द हुआ बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम
1950 में भारत का संविधान लागू होने यानी भारत के गणतंत्र बनने के बाद से आज तक सिर्फ दो बार ही बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम रद्द हुआ है। पहली बार 26 जनवरी 2001 में गुजरात में आए भूकंप के कारण बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम रद्द किया गया। दूसरी बार 2009 में जब 27 जनवरी के दिन लंबी बीमारी के बाद वेंकटरमन का निधन आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में हुआ था तब भी यह कार्यक्रम रद्द किया गया था।
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