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बिसाहड़ा के लिए खुशियां लेकर आई इस शादी में रह गई एक कमी

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इकलाख की मौत के 12 दिन बाद बिसाहड़ा में रविवार को हुई दो मुस्लिम लड़कियों की शादी भाईचारे व सद्भावना की मिसाल बन गई। (सभी फोटोः ब्यूरो/अमर उजाला)
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बिसाहड़ा के लिए खुशियां लेकर आई इस शादी में रह गई एक कमी

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गांव के हकीम ने बेटी जैतून और रेश्मा की शादी पूरे रीति रिवाज से की, जिससे गांव में एक बार फिर रौनक लौट आई। शादी में हिंदुओं का पूरा सहयोग मिला।
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जिलाधिकारी एनपी सिंह ने भी कन्यादान किया। वहीं, दूल्हों की खुशी का ठिकाना ही नहीं था, जिन्हें मीडिया की सुर्खियों से सजी इस शादी के ऐसे आयोजन की उम्मीद तक नहीं थी।

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28 सितंबर को हुए बवाल के बाद वर पक्ष ने गांव में बारात लाने से इंकार कर दिया था।
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हकीम ने भी बेटियों की शादी दादरी में करने का मन बना लिया था, लेकिन गांव के सभी लोगों के भरोसे और प्रशासन के दखल के बाद दोनों पक्ष गांव में ही शादी के लिए राजी हो गए।
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रविवार को रेश्मा की बारात प्यावली के मोबीन और जैतून की बारात सादुल्लापुर के नाजिम लेकर आए।
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गांव के प्राथमिक विद्यालय में शादी के इंतजाम किए गए थे, जिसमें आवभगत और खानपान की जिम्मेदारी हिंदुओं ने बढ़ चढ़-कर निभाई। दान-दहेज का खर्च परिवार और रिश्तेदारों ने उठाया।

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बिना किसी संगीत कि बेहद शांत ढंग से खुशनुमा माहौल में शादी हुई। स्कूल परिसर में बारातियों के स्वागत में हिंदू समुदाय के लोग सुबह से ही डटे रहे। बारातियों का गले मिलकर स्वागत किया गया।

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इकलाख के परिवार के सदस्यों को भी निमंत्रण भेज गया था, लेकिन कोई शादी में शरीक नहीं हुआ। शादी की पूरी व्यवस्था देख रहे एचके शर्मा का कहना है कि इकलाख के परिवार से कोई नहीं आया।
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हकीम की बेटियों में शादी के लिए न्यौता अन्य ग्रामीणों की तरह उनके घर पर भी पहुंचाया गया था। अगर उनके परिवार से कोई भी सदस्य शामिल हो जाता तो ऐसा लगता कि उनका दुख कुछ कम हो रहा है।
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