नवंबर 1984 के सिख दंगों में मारे गए हजारों लोगों की याद में बनाए गए स्मारक (सच की दीवार) रविवार को पीड़ितों के नाम समर्पित कर दी गई। स्मारक का उद्घाटन दंगों में मारे गए लोगों की विधवाओं ने किया। (सभी फोटोः कुमार संजय/अमर उजाला)
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सच की दीवार
- फोटो : अमर उजाला
गुरुद्वारा रकाबगंज में बनाए गए इस स्मारक में दंगों में मारे गए सभी लोगों का नाम लिखा गया है। इस स्मारक को सच की दीवार नाम दिया गया है और उसे सफेद मार्बल से बनाया गया है।
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स्मारक का उद्घाटन दंगों में मारे गए लोगों की विधवा गंगा कौर, बर्फी बाई, अरविंद कौर खालसा, जसपाल कौर, जसबीर कौर, अतर कौर इत्यादि ने नम आंखों से किया।
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उन्होंने नम आंखों से कहा आज उनके जख्म हरे हो गए हैं और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने उनके परिवारों की याद में स्मारक बनाकर जख्मों को भरने का काम किया है।
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सच की दीवार
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कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने इस अवसर पर कहा कि स्मारक को बनाने से रोकने के लिए कुछ लोगों व सरकार ने हरसंभव प्रयास किया लेकिन हमने संघर्ष कर इसे बनाया है।
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उन्होंने कहा स्मारक कातिलों को कड़ा जवाब है कि यह वह कौम है जो किसी से डरती नहीं है और तिलक-जनेऊ के लिए कुर्बानी देने वाले गुरुजी के उपदेशों को कायम रखने वाली है।
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सच की दीवार
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उन्होंने कहा कि हम इंसाफ पाने के लिए अंत तक लड़ाई जारी रखेंगे। इस अवसर पर सच की दीवार बनाने वाली कमेटी के चेयरमैन तनवंत सिंह, कुलदीप सिंह भोगल, रविन्द्र सिंह खुराना इत्यादि कमेटी सदस्य उपस्थित थे।
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इससे पूर्व बंगला साहिब गुरुद्वारे से शाम पीड़ितों का परिवार व अन्य नगर कीर्तन के रूप में गुरुद्वारा रकाबगंज पहुंचे।
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रकाबगंज गुरुद्वारे में अरदास के बाद उद्घाटन किया गया।
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कमेटी सदस्य तनवंत सिंह ने बताया 2500 वर्गमीटर क्षेत्र में बनाए गए स्मारक पर ढाई करोड़ रुपये का खर्च आया है।
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स्मारक को एक गली का रूप दिया गया है क्योंकि सिखों को राजधानी की गलियों में ही घेर कर मारा गया था। इसके अलावा सिखों को बचाने के प्रयास में अपनी जान देने वाले हिन्दू व मुस्लिमों के नाम पर भी अलग से दीवार बनाकर उनके नाम लिखवाए गए हैं।
सच की दिवार का उद्देश्य इंसानियत, सभी धर्म समान है इत्यादि है। मारे गए जिन लोगों के नाम पता नहीं चल पाए उनको श्रद्धांजलि देने के लिए एक कुंआ भी बनाया गया है।