फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vikas Dubey News: महाकाल मंदिर में बहुत रोया था विकास दुबे, जानें किस बात पर कहा- पुलिस ने मुझे मजबूर किया

Fri, 10 Jul 2020 10:31 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
कुख्यात अपराधी विकास दुबे - फोटो : ANI
विकास दुबे शुक्रवार सुबह उज्जैन से यूपी ले जाते वक्त एनकाउंटर में मारा गया। जिस गाड़ी में उसे पुलिस यूपी ले जा रही थी, वह कार अचानक पलट गई जिसके बाद विकास दुबे एक जवान की पिस्तौल छीनकर भागने लगा। वह काफी दूर तक भागा और पुलिस वाले भी लगातार उसका पीछा करते रहे। इस बीच पुलिसवाले उसे आत्मसमर्पण करने के लिए भी कहते रहे, लेकिन वह नहीं माना और पुलिसवालों पर भी गोलियां चलाईं। इसके बाद पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और आत्मरक्षा के लिए गोलियां चलाईं, जिसमें उसकी मौत हो गई।
हालांकि गिरफ्तारी के बाद उज्जैन में पुलिस ने उससे पूछताछ की थी जिसमें उसने बातें बताई और ये भी बताया कि वह महाकाल मंदिर में बहुत रोया था। उसे एक बात का अफसोस भी था, जानिए क्या है वो बात और वह महाकाल मंदिर में क्यों रोया था...
विज्ञापन

2 of 5
vikas dubey news - फोटो : amar ujala
मंदिर में बहुत रोया था विकास दुबे
विकास दुबे गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार हुआ था। उसे मंदिर में पहली बार सुबह करीब 7.00 बजे देखा गया था। जिसके बाद करीब दो घंटे बाद वह गिरफ्तार हुआ। विकास दुबे ने बताया कि इन दो घंटों के बीच वह महाकाल के मंदिर में बैठकर बहुत रोया था। कानपुर एनकाउंटर में जिस तरह से उसने पुलिसवालों को मारा वो सोचकर वह बहुत रोया।
विज्ञापन

3 of 5
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
विकास ने पुलिस को ये भी बताया था कि उसे अपने किए पर अफसोस है। उसने यह भी कहा कि, 'मुझे अपने किए पर अफसोस है, मुझे गोली चलाने के लिए मजबूर किया गया।' ऐसी ही बात विकास के करीबी प्रभात मिश्रा ने भी कही थी। प्रभात भी विकास की तरह ही फरीदाबाद से यूपी ले जाते वक्त एनकाउंटर में मारा गया। प्रभात ने ये बताया था कि उसे पुलिसवालों को मारने का अफसोस था।

4 of 5
kanpur encounter investigation - फोटो : amar ujala
दहशतगर्द विकास दुबे ने एमपी पुलिस की पूछताछ में पुलिसकर्मियों की हत्याएं कबूली थीं। उसका कहना था कि वो और उसके गुर्गे पुलिसकर्मियों के शव जलाने की तैयारी में थे ताकि वारदात के साक्ष्य मिट जाएं। पर, पुलिस बल वहां पहुंच गया इसलिए वो भाग निकले। चौबेपुर के अलावा शिवराजपुर, बिल्हौर और ककवन पुलिस पर भी मिलीभगत का दावा किया है। इन थानों के पुलिसकर्मी उसकेखास रहे हैं। 
विकास ने बताया कि उसने और साथियों ने मिलकर आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारा।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
शव जलाने के लिए पचास गैलन मिट्टी के तेल का भी इंतजाम पहले से किया गया था। विकास ने बताया कि गली के दोनों तरफ छत पर गुंडों को तैनात किया गया था। सभी असलहों से लैस थे। पुलिस के पहुंचते ही गोलियां बरसाईं गईं। पुलिसकर्मियों को घेरकर मारा जिससे किसी के बचने की कोई उम्मीद न रहे। विकास बोला कि चौबेपुर के पूर्व थानेदार विनय तिवारी, दरोगा केके शर्मा के अलावा अन्य कई पुलिसकर्मियों ने उसको दबिश की सूचना दी। चौबेपुर, शिवराजपुर, बिल्हौर और ककवन थाने की पुलिस उससे सेट थी। ऐसे में अब पुलिस अधिकारियों के पर्यवेक्षण पर सवाल उठने लगे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें