लोकसभा चुनाव 2019 में दलबदलू नेताओं ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। चुनावी मौसम में अपनी राजनीतिक सेहत के हिसाब से नेताओं पाला बदल किया है। किसी ने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया तो कोई मौजूदा पार्टी में मतभेद के कारण किसी और पार्टी के झंडे तले चला गया। आइए जानते हैं कौन कौन से दिग्गज नेताओं ने इस चुनाव में दल बदले हैं।
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फाइल फोटो
भाजपा से पाला बदलकर सांसद सावित्री बाई फुले ने कांग्रेस का दामन थामा लिया। कांग्रेस ने उन्हें उत्तर प्रदेश की बहराइच लोकसभा सीट से मैदान में उतारा है। वह पार्टी विरोधी बयानों के लिए लगातार चर्चा में थीं। कांग्रेस में शामिल होते समय उन्होंने कहा था- 'बीजेपी की दलित विरोधी नीतियों के चलते देश के पिछड़ों, दलितों और मुस्लिमों ने बीजेपी को सत्ता से हटाने का फैसला किया है। बहराइच लोकसभा सीट पर भाजपा के अक्षयबर लाल गौड़ को विजेता घोषित कर दिया गया है। इस सीट पर गठबंधन से सपा प्रत्याशी शब्बीर अहमद वाल्मीकि व कांग्रेस से सावित्री बाई फुले चुनाव लड़ रहे थे।
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राम चरित्र निषाद
- फोटो : Amar Ujala
2019 चुनाव एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी ने गोरखपुर में सपा को झटका दिया। जवाब में सपा ने भी भाजपा को झटका दिया। 19 मार्च को भाजपा सांसद रामचरित्र निषाद सपा में शामिल हो गए। सपा-बसपा गठबंधन उन्हें मिर्जापुर से गठबंधन का प्रत्याशी घोषित किया है। मिर्जापुर से एनडीए की प्रत्याशी अनुप्रिया पटेल उनसे काफी आगे रहीं। उनकी हार तय है।
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राकेश सचान
- फोटो : Amar Ujala
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता व फतेहपुर के पूर्व सांसद राकेश सचान ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। राकेश सचान मुलायम सिंह और शिवपाल के करीबी माने जाते हैं। रुझान के मुताबिक फतेहपुर बिन्दकी से काफी पीछे है। उनकी हार तय मानी जा रही है।
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कैशर जहां
- फोटो : Amar Ujala
इस चुनाव मौसम में 4 मार्च को सीतापुर से बहुजन समाज पार्टी की पूर्व नेता कैसर जहां कांग्रेस में शामिल हो गईं। बताया जा रहा है कि उन्होंने लोकसभा का टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर बसपा छोड़ी। कैसर जहां के अलावा उनके पति लहरपुर विधानसभा सीट के पूर्व विधायक जासमीर अंसारी, रिटायर्ड आईपीएस आफताब अहमद खान, चैम्बर ऑफ कॉमर्स के वाइस चेयरमैन सुरेन्द्र कुमार और मो. फारूख खान,अफजाल हुसैन अंसारी समेत सैकड़ों नेता कांग्रेस में शामिल हुए। उन्हें कांग्रेस से टिकट तो मिला लेकिन उनकी हार तय है।
समाजवादी पार्टी की पूर्व नेता व रामपुर की पूर्व सांसद जया प्रदा इस बार सपा का दामन छोड़ भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा ने उन्हें रामपुर से ही सपा नेता आजम खान के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा है। यहां आजम खान ने उनके खिलाफ विवादित बयान भी दिया जिसके कारण उनपर 48 घंटे का प्रचार से रोकने का प्रतिबंध भी लगा। लेकिन उनकी हार तय है।