उन्नाव की बिटिया के पिता की मौत मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत सभी सातों दोषियों को 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाते वक्त दिल्ली की एक अदालत ने अहम टिप्पणी की है। तीस हजारी अदालत के जिला जज धर्मेश शर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा, जिस तरह से अपराध किया गया। पीड़िता के पिता को बेरहमी से पीटा गया और दौड़ाया गया, ऐसे में दोषियों के प्रति कोई उदारता नहीं बरती जा सकती। सभी गुनहगार अधिकतम सजा पाने के हकदार हैं।
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kuldeep sengar
- फोटो : अमर उजाला
जज धर्मेश शर्मा ने कहा, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सेंगर और उसके सहयोगियों ने कानून का उल्लंघन किया गया है। सेंगर और दो पुलिसकर्मी एक सार्वजनिक पदाधिकारी थे और उन्हें कानून का पालन करना चाहिए था। दोषियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत कई सजाएं सुनाई गईं।
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kuldeep sengar
- फोटो : अमर उजाला
इनमें धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत पांच साल, धारा 193 (झूठे सुबूत देने) के तहत सात साल, धारा 203 (झूठी सूचना देने) के तहत दो साल, धारा 201 (अपराध के सुबूत गायब करने) के तहत दो साल, धारा 211 (जख्मी करके झूठे आरोप मढ़ना) के तहत सात साल, धारा 323 (चोट पहुंचाने) के तहत एक साल, धारा 341 (गलत तरीके से सख्ती बरतने) के तहत एक माह और आम्स एक्ट की धारा 25 के तहत तीन साल कैद की सजा सुनाई गई। सजा सुनाते समय, अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि दोषियों के लिए सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का यूपी सरकार को निर्देश
जज धर्मेश शर्मा ने पीड़िता के पिता की मौत के पीछे जांच रिपोर्ट में डॉक्टरों की लापरवाही को भी आडे़ हाथ लिया है। जज ने यूपी सरकार को ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ पर्याप्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। दरअसल, याचिकाकर्ता वकील धर्मेंद्र मिश्रा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि जिला अस्पताल ने जानबूझकर सेंगर के कहने पर पीड़िता के पिता का सही से इलाज नहीं किया, जिससे उनकी मौत हो गई।
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
अभी दो और मामलों में फैसला आना बाकी
ये दूसरी एफआईआर है, जिस पर कोर्ट ने शुक्रवार को सजा सुनाई है। अभी कार दुर्घटना में पीड़िता के परिवार के लोगों की मौत से जुड़ी दो एफआईआर पर कोर्ट का फैसला आना बाकी है। इससे पहले कोर्ट ने बीते 20 दिसंबर को कुलदीप सेंगर को उन्नाव दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
यह था मामला
सीबीआई के आरोपपत्र के मुताबिक, पीड़िता का पिता और उसका सहकर्मी तीन अप्रैल 2018 को अपने गांव लौट रहे थे और उसी दौरान उन्होंने रास्ते में शशि प्रताप सिंह से लिफ्ट मांगी थी, लेकिन उसने लिफ्ट देने से इनकार कर दिया था। इसी पर झगड़ा हो गया। इसके बाद शशि सिंह ने कुलदीप सेंगर के भाई अतुल और अन्य को मौके पर बुलाया और पीड़िता के पिता की बेरहमी से पिटाई की। गंभीर रूप से घायल पिता को अस्पताल पहुंचाने के बजाए आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज करवाकर जेल भिजवा दिया गया था। गहरी चोटों के कारण पीड़िता के पिता की 9 अप्रैल को न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुकदमे को यूपी से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था। सीबीआई ने मामले में 55 गवाहों के बयान दर्ज किए थे।