ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में जमींदोज हुई दो इमारतों में 16 परिवारों के लगभग 30-40 लोग दब गए हैं। प्रशासन, पुलिस और बिल्डरों की मिलीभगत और नियमों की अनदेखी के चलते हुए इस दर्दनाक हादसे ने कई जिंदगियां छीन लीं। तस्वीर में दिख रहे मलबे के नीचे दबे एक शख्स के पैर को देखकर ही आप ये समझ सकते हैं कि यह कितनी भयावह त्रासदी है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पीड़ितों ने कैसे बयां किया है अपना दुख... (सभी फोटोः लाल सिंह, जेपी शर्मा, सुनील शर्मा, राजेश भाटी)
विज्ञापन
2 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
'घर खरीदने का वादा पूरा किया, अब विदेश कौन ले जाएगा’ घर खरीदने के बाद विदेश घूमाने का वादा किया था। घर का वादा तो पूरा कर दिया, लेकिन विदेश लेकर कौन जाएगा। यह दर्द एक बेबस बुजुर्ग पिता का था, जो बुधवार को शाहबेरी में गिरी इमारत के पास बैठे हुए थे और उन्हें अपने बेटे शिव, पत्नी राजकुमारी, बड़े बेटे की पत्नी प्रियंका व पोती पंखुड़ी के मलबे में जिंदा होने की उम्मीद थी। लेकिन देर रात शिव, राजकुमारी, प्रियंका और पंखुड़ी के शव मलबे से निकाल लिए गए।
विज्ञापन
3 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी के उद्देतपुर अबई गांव निवासी सुरेन्द्र त्रिवेदी के छोटे बेटे शिव कुमार त्रिवेदी ने कुछ दिन पहले ही शाहबेरी में गिरी इमारत की चौथी मंजिल पर फ्लैट लिया था। शिव कुमार दिल्ली के कोटला स्थित एक कंपनी में जॉब करते थे। शनिवार (14 जुलाई) को उन्होंनेे फ्लैट में गृह प्रवेश किया था। गृह प्रवेश के दौरान परिवार के सभी सदस्यों के साथ-साथ दोस्तों को भी बुलाया था। दो दिन उसके घर का माहौल काफी खुशनुमा था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि दो दिन बाद ही उनकी यह खुशी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। गृह प्रवेश का कार्यक्रम पूरा होने के बाद सभी लोग अपने-अपने घर चले गये थे। फ्लैट पर शिव कुमार के साथ उसकी मां राजकुमारी, भाभी प्रियंका और भतीजी पंखुडी रुके थे।
4 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
टीवी पर खबर देखकर पहुंचे शाहबेरी बुधवार को टीवी पर खबर देखकर परिजन परेशान हो गये और उन्होंने शिव कुमार से संपर्क किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उसके बाद शिव कुमार के दोस्त शाहबेरी पहुंचे तो नजारा देखकर दंग रह गये। उसे परिवार के सदस्यों को जानकारी दी। उसके बाद परिवार मौके पर पहुंचा। परिवार की सदस्य नेहा ने बताया कि रात में शिव ने अपने दोस्त से विडियो कॉलिंग पर बात की थी।
विज्ञापन
5 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
दिन भर अपनों के लिये तड़पता रहा त्रिवेदी परिवार
इमारत का मलबा पड़ा हुआ था और उसमें परिवार के चार सदस्य दबे हो तो रुह कांप जाती है। ऐसा ही हाल त्रिवेदी परिवार का था। बार-बार मलबे के पास जा रहे थे और उसे दबे परिवार के सदस्यों को खोज रहे थे। दोपहर में कपड़े और अन्य सामान मिलने पर खलबली मच गयी। परिवार को लगा कि अभी सभी जिंदा है और बचाव कार्य को तेज करने की गुहार लगायी। सुबह से दोपहर तक जब परिवार को नहीं निकाला जा सके तो उनका धैर्य जवाब दे गया और पुलिस व प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया। कई बार काफी नोंकझोक भी हुयी। मुख्यमंत्री कार्यालय में फोन मिलाकर शिकायत भी की। डीएम से लेकर एनडीआरएफ जवानों से गुहार लगायी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
विज्ञापन
6 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
शाम को निकला प्रियंका का शव दिनभर आस लगाकर बैठे त्रिवेदी परिवार की उम्मीद शाम को उस समय बुरी तरह टूट गयी, जब प्रियंका का शव मलबे से निकाला गया। शाम को करीब साढ़े छह बजे शव निकाला गया और उसकी शिनाख्त करायी गयी तो माहौल गमगीन हो गया। त्रिवेदी परिवार और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। उनकी सभी उम्मीद टूट गयी।
विज्ञापन
7 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
ग्रेटर नोएडा में फंसा मैनपुरी का परिवार ग्रेटर नोएडा में गिरी छह मंजिला इमारत में मैनपुरी निवासी रामरतन त्रिवेदी का परिवार भी फंसा है। परिवार के सदस्यों में डेढ़ साल की मासूम पंखुड़ी सहित 23 वर्षीय शिवमए प्रियंकाए राजकुमारी फसे हुए है। शनिवार को फ्लैट का गृहप्रवेश था जिसमे मैनपुरी से भी परिवार के लोग शामिल होने गए थे। शिवम उर्फ शिवकुमार ग्रेटर नोएडा में गोदरेज कंपनी में इंजीनियर है। मैनपुरी के गांव उद्देत पुर अबई में इस घटना के बाद पूरे सन्नाटा पसरा हुआ हैए पूरा परिवार अपनों की आस में इंतजार कर रहा हैए गमजदा परिवार को गांव और आसपास के लोग ढांढस बंधाने आ रहे हैं। घर की महिलाओं का रो रो कर बुरा हाल है वहीं घर के कुछ सदस्य घटना स्थल को अपनो की तलाश में रवाना हो गए।
8 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
जिस मकान को रंगा था, उसी में हो गए दफन दो सगे भाई और उनका साथी फैजाबाद जिले के पलिया माफी गांव निवासी दो सगे भाई नौशाद अहमद ऊर्फ कल्लू (28) व शमशाद (24) और उनका एक साथ मोहम्मद मोबिन ऊर्फ सोनू (26) भी बिल्डिंग के मलबे में दब गये है। मंगलवार की रात शमशाद को बचाव दल ने निकला लिया था। बाकी दोनों को अभी मलबे में तलाशा जा रहा है।
9 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
तीनों पेंटर का काम करते थे। डेढ़ साल पहले ही गांव से यहां आये थे। फिलहाल उस सात मंजिला भवन में रह रहे थे, जो धराशायी हो गया है। इस भवन को बनाने वाले बिल्डर के लिये ही तीनों काम करते थे और बिल्डर ने ही उन्हें यहां रखा हुआ था। शमशाद के फूफा इरशाद ने बताया कि मंगलवार की शाम करीब सात बजे तीनों काम से वापस मकान में लौटे थे। तीनों उस समय आराम कर रहे थे। बुधवार को समाचार पत्रों में इमारत गिरने की जानकारी मिली। उसके बाद तीनों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। यहां आकर देखा तो पैरों तले से जमीन निकल गयी। तीनों ने इस भवन को रंगा था। उन्हें नहीं पता था कि एक दिन इसी भवन में तीनों दफन हो जाएंगे।
10 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
नवंबर में होनी थी शमशाद की शादी फूफा इरशाद ने बताया कि शमशाद की शादी तय हो चुकी थी। नवंबर में शादी होनी थी। उसी दिन शमशाद के दो बहनों की भी शादी होनी तय हुयी है। तीनों भाई-बहन की शादी एक-साथ होने से परिवार में खुशी का माहौल था। शादी की तैयारी चल रही थी, लेकिन सब बर्बाद हो गया। नौशाद ऊर्फ कल्लू की शादी चार साल पहले हो चुकी है। उसके दो लड़के है। वहीं सोनू की अभी शादी नहीं हुयी है।
11 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
पापा का इंतजार करते रहे अनुराग व किरण शाहबेरी में इमारत गिरने की जानकारी मिलने पर पश्चिम बंगाल निवासी रंजीत का परिवार वहां पहुंचा। रणजीत मलबे में दबा गया था। जिसका शव बडचाव दल ने रात में ही निकाल लिया था, लेकिन परिवार को इसका विश्वास नहीं हुआ और बुधवार को दिनभर परिवार रंजीत के बाहर निकलने का इंतजार करता रहा। पत्नी रंजना का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार सुबह से शाम तक मलबे के पास बैठे रहा।
12 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
पश्चिम बंगाल निवासी रनजीत सात मंजिला इमारत में रहता था और इसी बिल्डर की शाहबेरी में दूसरी साइट पर काम करता था। उसकी पत्नी रंजना व बेटा अनुराग व बेटी किरण दिल्ली के जगतपुरी में रहते है। इमारत गिरने से डेढ़ घंटे पहले रणजीत ने अपने साले तरुण से बात की थी और कहा था कि अकेले डर लगता है।
13 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार की सुबह जब इमारत गिरने की जानकारी परिजनों को मिली तो सभी दिल्ली से शाहबेरी आ गए। यहां इमारत की जगह मलबा मिला। पत्नी रंजना ने मलबे में जाकर पति को तलाश करने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों ने उसे रोक लिया और एक तरफ बैठा दिया। सुबह से शाम तक रंजना रोती रही और पति को बाहर निकालने की मांग करती थी।
14 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
वहीं उसके दोनों मासूम बच्चे अनुराग व किरण भी अपने पापा के आने का इंतजार करते रहे। जबकि, पुलिस कई बार बताया कि रंजीत का शव निकाला जा चुका है, लेकिन पत्नी और बच्चों को विश्वास नहीं हो रहा था कि रंजीत उनसे दूर जा चुका है। मृतक रंजीत के हाथ पर पत्नी रंजना का नाम लिखा हुआ है।
15 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
संकरी गलियां और भीड़ बनी बचाव कार्य में मुसीबत शाहबेरी गांव में गिरी छह और सात मंजिला इमारत में बचाव कार्य धीमी गति से चल रहा है। इसका कारण गांव की सकरी गलियां और भीड़ है। सकरी गलियों के कारण बचाव दल के वाहन नहीं पहुंच पा रहे है। साथ ही घटना स्थल पर लोगों का तांता लगा है। मेला देखने जाने की तरह सड़क पर लाइन लगी है। बचाव कार्य की गति धीमी होने पर परिजनों के साथ लोगों में भी काफी रोष है।
16 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
शाहबेरी गांव में जहां पर इमारत गिरी है, वह जगह गांव की मुख्य सड़क से दो किलोमीटर अंदर जाकर है। मुख्य सड़क से गांव में उतरने के साथ ही जो सड़क आती है, बेहद बेकार है। उबड़-खाबड़ है। सीवर व नालियों का पानी नहीं निकलने के कारण रास्ते में कई जगह कीचड़ है। यह सड़क कई जगह से सकरी है। जबकि, जिस जगह पर इमारत गिरी है, उसके आसपास की सभी सड़के काफी सकरी है।
17 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
वहां पर वाहन पहुंचना आसान नहीं है। कई जगह बेसमेंट की खुदाई की गयी है। इस कारण बड़े वाहनों को वहां तक ले जाना मुश्किल हो रहा है। जेसीबी से ही मलबे को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं भीड़ भी बचाव कार्य में बड़ी बाधा बनी है। बचाव कार्य के चारों तरफ बड़ी संख्या में हर समय लोग जमा रहते है।
18 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
जो शव मिलने की सूचना पर तुरंत ओर नजदीक पहुंच जाते है। घटना स्थल के आसपास बनी इमारतों पर भी भीड़ चढ़ी रहती है। यहीं नहीं, घटना स्थल के आसपास की सड़कों का नजारा कुछ इस तरह दिखाता है, जैसे किसी मेले को देखने लोग जा रहे है। पुलिस-प्रशासन भीड़ को नियंत्रित करने में नामकाम साबित हो रहे है। बचाव कार्य धीमा होने के कारण बुधवार को लोगों ने कई बार हंगामा भी किया।
19 of 21
building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
एक पल में बिखर गई बसी-बसाई दुनिया शाहबेरी गांव में बिल्डिंग के गिरने से कई लोग दब गए हैं। कई लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। लोग अपनों की तलाश में घटना स्थल और जिला अस्पताल की मोर्चरी में आ रहे हैं। यह लोग भगवान से यही दुआ कर रहे हैं कि इनके परिवार का सदस्य जिंदा हो। कई परिजन अपनों को कफन में देखकर फूट-फूटकर रो रहे हैं। आंखों में आंसू और आवाज में दर्द सुनकर अस्पताल में आने वाले मरीज तक खुद को रोने से नहीं रोक पा रहे थे। इस दर्द भरी घटना ने सभी की आंखों को नम कर दिया है। जो लोग इमारत में दबे हुए हैं, उनके जिंदा होने की सब दुआएं कर रहे हैं।
20 of 21
Shahberi Building Collapse
शिनाख्त के बाद भी नाती के सामने किया मना दिल्ली में रहने वाली रंजना अपनी मम्मी और भाई के साथ दिल्ली में नाना-नानी के पास रहती हैं। इसी साल उसने 12 वीं की परीक्षा पास की है और महाराजा अग्रसेन कॉलेज में दाखिला लिया है। उसके पिता शाहबेरी की इस बिल्डिंग में मिस्त्री का काम करते थे। हफ्ते में एक दिन वो परिवार से मिलने के लिए जाते हैं। मंगलवार को काम खत्म करके बुधवार की सुबह परिवार के पास जाना था। रंजना ने बताया कि उसके पापा रंजीत के एक दोस्त का सुबह फोन आया था कि जहां पर पापा काम करते हैं वो बिल्डिंग गिर गई है। हम लोग यहां पर आए तो पुलिस ने बताया कुछ शवों को चाइल्ड पीजीआई की मोर्चरी में रखा गया है। हम लोग यहां पर आए हैं। रंजना बार-बार दोहरा रही थी कि मेरे पिता को कुछ नहीं हो सकता। नानी ने बताया कि रंजना को सदमा लग गया है। इसलिए अभी उसके पापा की मौत की खबर उसको नहीं दी गई है। मैंने शव की शिनाख्त कर ली है, लेकिन उसके सामने मना कर दिया है। रंजना अभी ये दर्द बर्दाश्त नहीं कर पाएगी।
घर बसने से पहले ही छोड़ दी दुनिया फैजाबाद में रहने वाले शमशाद की मां का दो महीने पहले देहांत हो गया था। नवंबर माह में उसकी और दोनों बहनों की शादी होनी थी। इसलिए वो अपने बड़े भाई के साथ काम के लिए नोएडा आया था। बिल्डिंग में शमशाद अपने भाई कल्लू के साथ पेंटिंग का काम करता था। दोनों इसी बिल्डिंग में रहते हैं। जैसे ही घरवालों ने टीवी पर खबर देखी तो तुरंत सर्फाबाद में रहने वाले चाचा को फोन करके पता करने के लिए बोला। इरशाद ने बताया कि शमशाद तीन भाई और दो बहनें हैं। एक बड़ा भाई काम के सिलसिले में सऊदी अरब गया है। दोनाें भाई नोएडा में काम के लिए आए हुए थे। बड़े भाई कल्लू की शादी हो रखी है। उसके दो बच्चे भी हैं। नवंबर में शमशाद की शादी और उसकी बहनों की शादी होनी थी। लेकिन किसी को नहीं पता था कि घर बसने से पहले ही शमशाद हम लोगों को छोड़कर चला जाएगा। चाचा ने शमशाद की शिनाख्त कर ली है।