दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रही ईएमयू में जिस तरह 16 साल के जुनैद की हत्या की गई उसने कई तरह की बहसों को जन्म दे दिया है। यह मामला गौरक्षा से तो जुड़ा ही है, साथ ही इसने ट्रेन के यात्रियों की सुरक्षा पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय रेलों की सुरक्षा पर हमेशा ही सवाल उठते रहे हैं। यहां पहले भी छोटी सी बात पर जान लेने जैसी वारदातें हुई हैं। ऐसे हादसे वीवीआईपी लोगों के साथ भी हो चुके हैं।
विज्ञापन
2 of 8
डेमो
हम यहां साल 2004 की बात कर रहे हैं जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पोते को मामूली बात पर ट्रेन से फेंक दिया गया था। इसके बाद उसकी मौत हो गई थी।
विज्ञापन
3 of 8
फाइल फोटो
गौरतलब है कि वाजपेयी जी की बहन कमला मिश्रा के पोते मनीष मिश्रा छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से अपने दो मित्रों के साथ मथुरा से कोसी कलां जा रहे थे।
4 of 8
gurugram gang rape
मनीष ने देखा कि ट्रेन में कुछ लड़के जो नशे में धुत थे लड़कियों को छेड़ रहे थे। यह देखकर मनीष से रहा न गया और उन्होंने इसका विरोध किया जिसके बाद उन मनचले लड़कों से उनकी झड़प हो गई।
विज्ञापन
5 of 8
डेमो
- फोटो : डेमो पिक
पुलिस के अनुसार जब ट्रेन वृंदावन गेट स्टेशन पर रुकी तो वो लड़कियां वहां उतर गईं लेकिन ट्रेन दोबारा चलने पर उन बदमाशों ने मनीष और उसके दोस्तों के साथ मारपीट शुरु कर दी।
विज्ञापन
6 of 8
ट्रेन
मारने से मन नहीं भरा तो बदमाशों ने मनीष और उसके दोस्तों को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। इस घटना में वाजपेयी जी के पोते मनीष की मौत हो गई जबकि अन्य दो गंभीर रूप से घायल हो गए।
विज्ञापन
7 of 8
ATAL BIHARI VAJPAYEE
- फोटो : File Photo
यह घटना साल 2004 के 26 जनवरी के आसपास की है। वाजपेयी जी इस घटना से इतने दुखी थे कि गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले एट होम कार्यक्रम में भी हिस्सा नहीं लिया था।
इस घटना से काफी हद तक स्पष्ट है कि रेलवे में यात्रा करने वालों की सुरक्षा किस स्तर की है और आज भी रेल यात्रा खतरे से भरी है। ऐसी ही एक घटना का शिकार बल्लभगढ़ का जुनैद हुआ। जिसे कुछ लोगों ने बीफ ले जाने के शक में ट्रेन में इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। जुनैद के परिवार वालों कहना है कि अगर ट्रेन में तैनात आरपीएफ वक्त पर वहां पहुंच जाती या आसपास के लोग उसे बचाते तो ये घटना रोकी जा सकती थी।