देश के किसी भी नागरिक को वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस लेना जरूरी होता है और इसके लिए उसका बालिग होना चाहिए, लेकिन शायद नोएडा में लोग इसकी जरूरत महसूस नहीं करते। यही वजह है कि स्कूलों की छुट्टी के समय नाबालिग बाइक चलाते हुए आसानी से दिख जाते हैं। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हुए एक बाइक पर तीन लोग बैठते हैं। यही नहीं इनके पास अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट भी नहीं होता। कई बार नाबालिग अभिभावकों की जानकारी में अथवा उनके बिना जानकारी के स्कूल में कार भी ले आते हैं और छुट्टी के बाद उसमें शोर मचाते हुए सड़कों पर चलते हैं। दूसरी ओर शहर में कई ऑटो की स्टेयरिंग नाबालिगों के हाथों में दिखती है।
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- फोटो : राजन राय
कई मामलों में चालक अपने साथ एक हेल्पर रखता है, जो किसी की परवाह किए बगैर कभी कभार नाबालिग हेल्पर को ही ऑटो की स्टेयरिंग सौंप देता है। उस समय भी जब ऑटो में यात्री बैठे होते हैं। लापरवाही की हद तो यह है कि अगर हेल्पर थोड़ा सा भी गाड़ी चलाना सीख जाता है तो मालिक उसे ऑटो चलाने के लिए भेजना शुरू कर देता है। पार्किंग, लेन, सिग्नल आदि की जानकारी के अभाव में ऐसे अप्रिशित नाबालिग चालक अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं।
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- फोटो : राजन राय
नाबालिगों के हाथों हुए हादसे
-अप्रैल 2016 में दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में एक नाबालिग ने मर्सिडीज कार से एक शख्स को ंटक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने नाबालिग को हिरासत में लिया। यही नहीं उसके पिता पर भी मुकदमा दर्ज किया गया।
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- फोटो : राजन राय
-सितंबर 2016 में आजमगढ़ में परिजनों को बिना बनाए छोटे बच्चों को स्कॉर्पियो में बैठाकर एक नाबालिग निकल गया। आगे जाकर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसकी चपेट में दो दुकानें भी आ गईं। बाद में पुलिस ने अभिभावक को खूब फटकार लगाई।
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- फोटो : राजन राय
यह है नियम
परिवहन अधिकारियों के मुताबिक 16-18 साल तक के युवाओं को बिना गियर के वाहनों के लिए लाइसेंस बनाया जाता है, लेकिन इसमें अभिभावकों की भी सहमति होनी जरूरी होती है। 18 साल के ऊपर के युवाओं को गियर वाले वाहन चलाने के लिए लाइसेंस दिया जाता है।
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- फोटो : राजन राय
नाबालिगों को न सौंपे वाहन
नाबालिगों के खिलाफ परिवहन विभाग समय-समय पर अभियान चलाता है और चालान काटा जाता है। यही नही, स्कूलों व अभिभावकों से भी अपील की जाती है कि वे नाबालिगों को गाड़ी न सौंपें। अगले सप्ताह नाबालिग चालकों के खिलाफ एक अभियान चलाया जाएगा। -एसके सिंह, एआरटीओ (प्रवर्तन)
कभी चालान तो कभी अभिभावकों को चेतावनी
ट्रैफिक नियमों की तोड़ते हुए लोगों को कई बार मौके पर पकड़ा जाता है। इसमें बिना डीएल पकड़े गए ड्राइवरों के बारे में पता चलता है कि वह नाबालिग है। इसके बाद उनके अभिभावकों को बुलाकर चेतावनी दी जाती है। महीने में ऐसे करीब 12 मामले सामने आ जाते हैं, जहां नियम के मुताबिक चालान किया जाता है। -धर्मेंद्र यादव, टीआई
अभिभावक और स्कूल दोनों दोषी
बच्चों को वाहन देने में अभिभावक भी दोषी हैं। यही नहीं अगर बच्चा किसी तरह से वाहन लेकर स्कूल पहुंच जाता है तो स्कूल को एक्शन लेना चाहिए। यहां स्कूल की भी लापरवाही है। इसके अलावा प्रशासन से अपील है कि अभियान चलाकर स्कूलों के बाहर खड़े वाहनों की जांच हो और नाबालिगों की बाइक पकड़े जाने पर उसे जब्त किया जाए।-अनूप खन्ना, महासचिव, छात्र अभिभावक संघ