तीस हजारी में पुलिस व वकील बवाल की दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एसआईटी ने उस दिन अदालत में वकीलों की मौजूदगी की पुष्टि के लिए तकनीकी साधनों की मदद ले रही है और इसके लिए घटना वाले दिन वहां चले मोबाइल का डंप डाटा निकलवाया जा रहा है। अगर सीसीटीवी फुटेज से पहचान में दिक्कत होती है तो मोबाइल सर्विलांस से आरोपी के तीस हजारी कोर्ट में होने का पुख्ता दावा हो जाएगा।
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तीस हजारी कोर्ट बवाल
- फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ एसआईटी की जांच में यह बात सामने आई है कि रोहिणी जेल से बदमाश को लेकर आए सिपाही की रायफल भी छीन ली गई थी।
अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस को तीस हजारी कोर्ट से करीब 41 सीसीटीवी फुटेज मिली हैं। सीसीटीवी फुटेज में ज्यादातर आरोपी दिखाई दे रहे हैं। कई सीसीटीवी फुटेज से आरोपी को पहचान में परेशानी हो जाती है।
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tis hazari court
- फोटो : अमर उजाला
इस कारण तीस हजारी कोर्ट की घटना वाले दिन का मोबाइल का डंप डाटा निकलवाया जा रहा है। डंप डाटा से यह पता लगेगा कि उस समय तीस हजारी कोर्ट में कितने फोन चल रहे थे। सीसीटीवी फुटेज के साथ मोबाइल लोकेशन से आरोपी के तीस हजारी कोर्ट में होने का पुख्ता सबूत मिल जाएगा। डंप डाटा निकलवाने के बाद सभी आरोपियों को फोन कर उनकी पहचान की जाएगी और मोबाइल की लोकेशन निकलवाई जाएगी।
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तीस हजारी कोर्ट में बवाल
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एसआईटी की जांच में ये बात सामने आई है कि तीसरी बटालियन में तैनात सिपाही मनीष रोहिणी जेल से बदमाश को लेकर आया था। वह जेल वैन में बैठा हुआ था। तभी वकीलों की एक भीड़ ने उसकी रायफल छीन ली थी। हालांकि सिपाही मनीष ने समझदारी दिखाते हुए रायफल से कारतूसों को निकालकर अपनी जेब में डाल लिया था।
बाद में जेल वैन में आग लगा दी गई। हालांकि काफी बाद में भीड़ ने रायफल को तीस हजारी लॉकअप के सामने फेंक दिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार वकील जब तीस हजारी लॉकअप में घुसे थे उस समय वहां एक खुले कमरे में काफी असलहा रखा था। इसमें करीब 15 पिस्टल, एके-47 व एलएसआर थीं। इन हथियारों के भी लूटने का डर था। लॉकअप का गेट बंद होने से हथियार बच गए। उत्तरी जिले के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हरेन्द्र कुमार के ऑपरेटर से लूटी गई पिस्टल का अभी तक पता नहीं चला है।