नौ साल से अपनी ही बेटी आरुषि तलवार और नौकर हेमराज की हत्या के मामले में न्याय के लिए संघर्ष कर रहे तलवार दंपत्ति को आखिर आज न्याय मिल ही गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों को निर्दोष मानते हुए बरी करने का आदेश दिया। जबकि नुपुर और राजेश तलवार को सीबीआई कोर्ट ने इसी मामले में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। असल में हाईकोर्ट द्वारा तलवार दंपत्ति को दोषमुक्त माने जाने के पीछे इन तीन वजहों को बेहद अहम माना जा रहा है...
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1- पिछले नौ साल से आरुषि-हेमराज हत्या मामले में सीबीआई की भूमिका को लेकर कई बार सवाल उठे हैं। इस मामले में सीबीआई कोर्ट ने भले ही तलवार दंपत्ति को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी लेकिन सच ये है कि इस हत्याकांड का कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं है। 15 मई 2008 की रात डॉक्टर राजेश तलवार के घर में होने वाले इस दोहरे हत्याकांड के दिन घर में केवल चार लोगों के मौजूद होने के सबूत मिले हैं जिनमें से दो लोगों की हत्या हो चुकी थी।
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- फोटो : File Photo
2- रहस्य के जाल में लगातार उलझने के बाद इस मामले को यूपी पुलिस की जगह सीबीआई कोर्ट को सौंप दिया गया। सीबीआई जांच के बावजूद इस मामले में हत्या करने वाले के खिलाफ सीबीआई भी कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई। असल में तलवार दंपत्ति को परिस्थिजन्य साक्ष्यों के आधार पर ही दोषी माना गया है।
3- इस मामले में जो बात चौंका देने वाली है ये है कि वारदात वाले दिन यानि 15 मई 2008 की रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच हुई घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने में यूपी पुलिस ही नहीं सीबीआई भी असफल रही है।