आमतौर पर ये धारणा है कि तेजाब हमले का शिकार लड़कियां होती हैं। एसिड अटैक पीड़ित लोगों में लड़कियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि लॉ कमीशन ने एसिड अटैक को लिंग आधारित अपराध की श्रेणी में रखने की भी बात कही है।
(स्टोरी साभारः डेली मेल)
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acid attack survivor
लेकिन आपको जानकार आश्चर्य होगा कि तेजाब हमले में पुरुषों के तौर पर पीड़ितों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसका बड़ा कारण ये है कि पुरुषों पर होने वाले ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं किए जाते।
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acid attack survivor
हम आपको देश की राजधानी दिल्ली में होने वाले एसिड अटैक पीड़ित ऐसे पुरुषों के बारे में बता रहे है जिनकी सच्चाई सुन किसी का भी दिल दहल जाए।
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acid attack survivor
लगभग ढाई साल के आदित्य राज को 13 दिसंबर को अपहरण कर लिया गया। अपहरण करने वाला उसकी मां का प्रेमी था। उस वक्त उसके पिता आदित्य के साथ थे। बस कुछ छणों के लिए वो उससे दूर हुए और आदित्य वहां से गायब हो गया।
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एसिड अटैक के बाद झुलसा मासूम
- फोटो : अमर उजाला
अगले दिन एक नाली के पास पुलिस को बेहोश हालत में एक बच्चा मिला जिसका मुंह बुरी तरह झुलसा हुआ था। असल में उसके मुंह पर तेजाब डाला गया था। ये बच्चा आदित्य ही था। बेहद गंभीर हालत में झुलस चुके आदित्य की सांसें अभी चल रही थी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी जान बच गई।
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एसिड अटैक के बाद झुलसा मासूम
- फोटो : अमर उजाला
तब से आज तक आदित्य के मां-बाप रोज ही उसे लेकर अस्पताल जाते हैं। जल्द ही उसका एक और ऑपरेशन होने वाला है जिससे उसकी नाक के बंद हो चुके वो छिद्र खुल सकते हैं जिसे उसे सांस लेने में परेशानी होती है।
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एसिड अटैक
इससे भी दर्दनाक बात ये है कि अब आदित्य की बाईं आंख बंद ही नहीं होती। यहां तक की रात में सोते वक्त भी उनकी आंखें खुली ही रहती हैं।
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उपेंद्र कुमार
ये कहानी यहीं नहीं रुकती। 14 साल के उपेंद्र कुमार भी इसी तरह एसिड अटैक का शिकार हुए थे। असल में घर में पड़ोसी के साथ हुए विवाद में उसके मुंह पर तेजाब फेंक दिया गया था।
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acid attack survivor
इस हमले में उसके दोनों आंख की कार्निया को गंभीर नुकसान हुआ। इसका नतीजा ये हुआ है कि पिछले दो साल से उपेंद्र कुमार की पढ़ाई बंद पड़ी है।
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फिरोज खान
42 साल के फिरोज खान पर उनके पड़ोसी ने तेजाब फेंक दिया था। जब ये घटना हुई तो उनकी उम्र 27 साल थी। फिरोज खान कहते हैं कि उनकी ये शारीरिक पीड़ा तब मानसिक परेशानी में तब्दील हो जाती है जब हर बार कोर्ट में उन्हें ये साबित करने जाना पड़ता है कि वो एक खतरनाक अपराध के शिकार हैं।
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acid attack survivor
लगातार 15 साल से वो अपना इलाज करा रहे हैं। साथ ही साथ तीस हजारी कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। वो बताते हैं कि तेजाब का हमला इतना घातक था कि एक साल तक वो लेट भी नहीं पाए थे क्योंकि उनके पीठ में मवाद भर गया था।
तेजाब हमले की गंभीरता को देखते हुए 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब की बिक्री पर रोक लगा दी था। लेकिन अभी भी दिल्ली में तेजाब खुलेआम और बिना किसी रोकथाम के बेचा जा रहा है।