दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
Thu, 05 Nov 2015 09:16 PM IST
क्रॉनिक किडनी डिजीज से लड़ रहे 10 वर्षीय मासूम जिसे राजस्थान पुलिस ने एक दिन के लिए पुलिस कमिश्नर भी बनाया था, ने आखिरकार जिंदगी की जंग जीत ली।
दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
गौरतलब है कि 10 साल के गिरीश को गुड़गांव के मेदांता मेडिसिटी में किडनी डिजीज के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। वहां उसके रोग का सफल इलाज हुआ है।
दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
बता दें कि गिरीश के इलाज का खर्च हरियाणा के ही एक नेता गोपाल कांडा ने उठाया है और गिरिश की मां ने उसे किडनी दान की है।
दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
गिरिश अपना इलाज कराकर आज अपने घर सिरसा पहुंच रहा है।
दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
गिरीश की पुलिस कमिश्नर बनने की ख्वाहिश को राजस्थान की संस्था मेक-ए-विश ने पूरा करने में सहायता की थी।
दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
इसी साल राजस्थान के अस्पताल में दाखिल गिरीश को इस संस्था ने पुलिस के साथ मिलकर 1 मई को एक दिन का पुलिस कमिश्नर बनवाया था।
दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
गिरीश के पिता जगदीश का कहना है कि गिरीश की बचपन से ही पुलिस अधिकारी बनने की इच्छा थी।
दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
गिरिश के पिता ने बताया कि वह पढ़ाई में बहुत होशियार है और तीसरी कक्षा में पढ़ता है।
दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
बता दें कि गिरिश की दोनों ही किडनियां खराब थीं। जिनका मेदांता में इलाज हुआ है।
दोनों किडनी खराब होने के बावजूद नन्हा कमिश्नर जीता जिंदगी की जंग
गिरिश के पिता जगदीश शर्मा ने बताया कि उनके बच्चे का सफल इलाज हो गया है। इसके साथ-साथ उन्होंने गोपाल कांडा का भी धन्यवाद किया है। जिन्होंने इलाज के लिए 13 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च उठाया है।