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सरकारी खर्चे पर सांसदों का चाय-पानी कराया था बंद, पढ़ें उनके बारे में ऐसी ही खास 10 बातें

Mon, 13 Aug 2018 02:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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somnath chaterji - फोटो : अमर उजाला
तीन दशक से भी ज्यादा के अपने राजनीतिक कार्यकाल में 10 बार सांसद रह चुके लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चैटर्जी का आज(13 अगस्त) 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। सोमनाथ चटर्जी को हमेशा एक सख्त लोकसभा स्पीकर के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने अपने दिल की बात सुनने के लिए पार्टी लाइन से अलग हट गए। उनके जीवन की कई ऐसी बातें हैं जो कम लोगों को मालूम हैं और बहुत प्रेरणादायी भी हैं। पढ़ें ऐसी ही 10 खास बातें...
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somnath chaterji
1- सोमनाथ चटर्जी का जन्म असम के तेजपुर में 25 जुलाई 1929 को हुआ था। उनके पिता निर्मल चंद्र चटर्जी अखिल भारतीय हिंदू महासभा के संस्थापकों में से एक थे और पेशे से वकील थे। उनकी माता का नाम वीणापाणि देवी था।
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somnath chaterji - फोटो : अमर उजाला
2- सोमनाथ चटर्जी की पढ़ाई कोलकाता और ब्रिटेन में हुई। उन्होंने ब्रिटेन के मिडिल टैंपल से लॉ की पढ़ाई की और फिर कोलकाता हाईकोर्ट में वकालत करने लगे। हालांकि नियती ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। वकालत करते-करते उन्होंने राजनीति में आने का फैसला कर लिया। हालांकि तब तक वह एक प्रखर वक्ता के रूप में लोगों की नजरों में आ चुके थे।

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somnath chaterji
3- सोमनाथ चटर्जी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत ही विरोधाभासों से शुरू हुई। उनके पिता जहां दक्षिणपंथी राजनीति से थे तो सोमनाथ ने अपने राजनीति की शुरुआत ही सीपीएम के साथ 1968 में की।
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4- राजनीति में प्रवेश के तीन साल बाद ही 1971 में वह सांसद चुन लिए गए और फिर उन्होंने राजनीति में पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह 10 बार लोकसभा सांसद बने। राजनीति में सोमनाथ चटर्जी का कद बहुत बड़ा है और उन्हें हर पार्टी का सम्मान मिला है। साल 2004 में 14वीं लोकसभा के लिये उन्हें सभी दलों की सहमति से लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया।
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5- सोमनाथ चटर्जी की पत्नी का नाम रेणु चटर्जी है। उनका एक बेटा और दो बेटियां हैं। सोमनाथ चटर्जी 2004 में आखिरी बार(10वीं बार) सांसद चुने गए। सोमनाथ चटर्जी को 1996 में उत्कृष्ट काम के लिए सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार भी मिल चुका है। उन्होंने लागातार 35 सालों तक सांसद के तौर पर देश की सेवा की।
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somnath chaterji - फोटो : अमर उजाला
6- सोमनाथ चटर्जी को अपने पूरे राजनीतिक करियर में सिर्फ एक बार हार का सामना करना पड़ा और वो साल था 1984 का। उन्हें तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी ने हराया था। यह वही दौर था जब ममता राजनीति की गलियारों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही थीं और किसी को अंदाजा भी नहीं था कि सोमनाथ जैसे कद्दावर नेता हार जाएंगे।

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somnath chaterji - फोटो : अमर उजाला
7- सोमनाथ चटर्जी राजनीति में पादर्शिता और सुचिता के हिमायती थे। जब वह लोकसभा स्पीकर बनें तो उन्होंने सबसे पहले जो फैसला किया वो ये कि सरकारी खर्च पर सांसदों के चाय पानी पर पाबंदी लगाई जाए। वैसे तो उनके इस फैसले का भारी विरोध हुआ लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की। बल्कि इससे आगे जाते हुए उन्होंने सांसदों पर ये भी दबाव बनाया कि वह विदेशी दौरों पर अपने परिवार का खर्च खुद उठाएं।

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somnath cahtterjee
8- जब अपनी पार्टी से निकाले गए तो ले लिया सन्यास- जीवन पर्यंत सिद्धांतों की राजनीति करने वाले सोमनाथ चटर्जी को अपने एक फैसले की वजह से पार्टी से निकाल दिया गया था। दरअसल 2008 में यूपीए-2 की सरकार अमेरिका से परमाणु समझौता कर रही थी और उनकी पार्टी सीपीएम इसका कड़ा विरोध कर रही थी। तब सीपीएम ने सरकार से समर्थन भी वापस ले लिया और सोमनाथ को भी स्पीकर के पद से इस्तीफा देने को कहा। तब सोमनाथ चटर्जी ने ऐसा नहीं किया। बाद में जब मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो सोमनाथ चटर्जी ने पार्टी लाइन से अलग जाकर सरकार के खिलाफ वोट नहीं दिया। इससे नाराज पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। अगले ही साल सोमनाथ चटर्जी ने सक्रिय राजनीति को अलविदा कह दिया। सोमनाथ चटर्जी के शब्दों में पार्टी से निकाला जाना उनके जीवन का सबसे दुखद वाकया था।

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Somnath Chatterjee
9- सितम्बर 2006 में सोमनाथ चटर्जी को अबुजा, नाइजीरिया में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ का अध्यक्ष चुना गया। उनके नेतृत्व तथा समर्थ दिशानिर्देश में भारत ने सितम्बर, 2007 के दौरान नई दिल्ली में 53वें सीपीए सम्मेलन की सफलतापूर्वक मेजबानी की जिसमें 52 देशों को विविध क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों से अवगत कराया गया।
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10- लोकसभा अध्यक्ष के रूप में व्यापक मीडिया कवरेज प्रदान करने हेतु सोमनाथ चटर्जी के प्रयासों से ही 24 जुलाई 2006 से 24 घंटे का लोकसभा टेलीविजन शुरू किया गया। उनके लोकसभा अध्यक्ष पर रहते हुए उनकी पहल पर ही भारत की लोकतांत्रिक विरासत पर अत्याधुनिक संसदीय संग्रहालय की स्थापना की गई। 14 अगस्त 2006 को इस संग्रहालय का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति के कर कमलों से किया गया। यह संग्रहालय जनता के दर्शन करने के लिए खुला है।
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