मरे किसानों की खोपड़ियों के साथ ही मुंह मे जिंदा चूहे और मरे सांपों को लेकर पिछले तीन हफ्ते से भी ज्यादा समय से दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों जब पीएम से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे और वह वहां मौजूद नहीं थे तो किसानों ने नग्न प्रदर्शन शुरु कर दिया। आगे पढ़िए पूरी घटना।
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farmer protest
- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल सूखे और कर्ज की मार झेल रहे तमिलनाडू के किसानों का एक समूह 14 मार्च से राजधानी के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहा है। जब तमिलनाडु में इनकी व्यथा नहीं सुनी गई तो ये दिल्ली आने को मजबूर हुए लेकिन यहां भी इनकी कोई नहीं सुन रहा।
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दरअसल किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने के लिए पीएमओ पहुंचा था। दिल्ली पुलिस उन्हें इस काम के लिए खुद जंतर-मंतर से लाई थी।
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- फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी उस वक्त दफ्तर में मौजूद नहीं थे लेकिन किसान करीब दस मिनट तक पीएमओ के भीतर रहे। बाहर आने पर उस दल का एक सदस्य अचानक पुलिस के वाहन से कूद गया और नग्न होकर सड़क पर दौड़ने लगा। इसी तरह उसके तीन अन्य साथी भी कपड़े उतारकर नॉर्थ ब्लॉक की सड़कों पर उतर आए।
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पिछले दिनों इन किसानों ने आधे बाल और आधी मूंछ मुंडाकर भी प्रदर्शन किया था।
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तबीयत बिगड़ने के बाद पांच किसान अस्पताल भी पहुंचे
जंतर-मंतर पर धरना दे रहे तमिलनाडु के किसानों में से पांच की तबीयत शनिवार को बिगड़ गई। इन किसानों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया जिनमें तीन को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। दो किसानों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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तमिलनाडु के सूखाग्रस्त किसान 14 मार्च से भूख हड़ताल कर रहे हैं। तमिलनाडु से दूसरे किसानों के साथ प्रदर्शन के लिए दिल्ली आए अखिलन, पेरुमल, पालमी स्वामी, मुरुगन, एसआर करनन की तबीयत शनिवार को अचानक खराब हो गई। इन्हें आरएमएल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पेरुमल व पालमी स्वामी के अलावा सभी को छुट्टी दे दी गई।
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farmer at jantar mantar
तमिलनाडु के किसानों की अगुवाई करने वाले अय्याकन्नू ने बताया कि तमिलनाडु में एक दशक से सूखा पड़ रहा है। पिछले एक साल में सूखा का प्रभाव बेहद ज्यादा रहा है। ऐसा सूखा 150 साल पहले पड़ा था। इसके चलते किसान कर्ज में डूबे हैं और आत्महत्या कर रहे हैं। एक साल की अवधि में करीब 400 किसान खुदकुशी कर चुके हैं।
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सूखाग्रस्त इलाके के ये किसान सरकार से राज्य के किसानों का 7000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने, सूखा राहत निधि से 40 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने, सूखे की समस्या से निपटने के लिए राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने, किसानों को उनकी फसल का सही दाम देने और बुजुर्ग किसानों व उनकी मौत के बाद आश्रितों को पेंशन देन की मांग कर हैं।
किसानों ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है। वह कई बार मंत्रियों से भी मिल चुके हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी उनकी समस्या पर विचार करने का आश्वासन दिया है।