दाल सिर्फ महंगी ही नहीं है बल्कि यह खतरनाक भी है। दाल के बढ़ते दाम और इसके आम ग्राहकों की पहुंच से दूर हो जाने के चलते इसके साथ कई और चीजें भी जुड़ी हैं।
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NCR में बिक रही वो जहरीली दाल जिस पर 1961 से है प्रतिबंध
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स्थानीय व्यापारी दाल में सस्ता और निम्न गुणवत्ता का खेसारी मिला रहे हैं, जोकि 1961 में ही सरकार के द्वारा बैन किया जा चुका है। गुड़गांव में एक बड़े पैमाने पर दाल में मिलावट की शिकायत सामने आ रही हैं।
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NCR में बिक रही वो जहरीली दाल जिस पर 1961 से है प्रतिबंध
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खेसारी कभी जानवरों के खाने में प्रयोग में लाया जाता था। लेकिन इसका असर इतना खतरनाक नजर आया कि इसे बंद करना पड़ा। विशेषज्ञों की मानें तो खेसारी मिश्रित दाल में डाई-अमीनो-प्रो-पायोनिक-एसिड होता है, जोकि शरीर के नीचले हिस्से को लकवाग्रस्त बनाता है।
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यह शरीर के दूसरे अंगो और हड्डियों पर भी बुरा असर ड़ालता है। लेकिन गुड़गांव में व्यापारियों ने इसे अरहर संकट को भुनाने के लिए बेचना शुरू कर दिया है।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अनाज मंडी, दून्दहेरा, मुलाहेड़ा, सुरत नगर, बेगमपुर खटौला, नौरंगपुर और गांवों के आस-पास के क्षेत्रों में मिलावटी अरहर और खेसारी दाल खुलेआम बिक रही है।
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खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में हालात ऐसे नही हैं। खेसारी दाल पर 1961 में प्रतिबंध लगाया गया था। जबकि हर साल आदेश और सर्कुलर भी जारी किया जाता है। मिलावटी अरहर और दाल की उन्हें अबतक कोई शिकायत नहीं मिली है।
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वहीं गुड़गांव के खुदरा व्यापारियों का कहना है कि खेसारी दाल 40-50 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध है। इसे अरहर की दाल में मिलाने के बाद अंतर करना या पहचानना मुश्किल होता है।
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इतना ही नहीं प्रवासी मजदूर जो इसे खरीदते हैं, वे इसके नुकसानदेह असर के बारे में भी नहीं जानते। खेसारी दाल में 41 फीसदी कार्बोहाइड्रेट, 31 फीसदी प्रोटीन, 17 फीसदी फाइबर होता है।
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गुड़गांव के मुख्य मेडिकल अधिकारी रमेश धनकड़ ने जगह-जगह बिक रही खेसारी दाल पर छापेमारी के लिए खाद्य विभाग की एक टीम बनाई है। ये टीम अबतक खांडसा अनाज मंडी की 10 दुकानों पर छापा मार चुकी है और वहां से खेसारी दालों के नमुने एकत्र किए हैं।
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दाल खरीदने वाले मजदूरों ने बताया कि वे शुध्द अरहर की दाल खरीदने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि इसकी कीमत 230 रुपए प्रति किलो है। जबकि मिश्रित दाल की कीमत 90 से 100 रुपए प्रति किलो है। ऐसे में वे इसे ही खरीद रहे हैं।
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खेसारी दाल ज्यादातर गुड़गांव के औद्योगिक इलाकों में बिक रही है। यहां पर बड़ी संख्या में गरीब प्रवासी मजदूर रहते हैं। खेसारी की फसल बिहार, उत्तर प्रदेश, ओड़िसा, पश्चिम बंगाल, और छत्तीसगढ़ में पैदा की जाती है। यह गुड़गांव में दिल्ली , नीमच और हापुड़ मंडी से होते हुए पहुंचती है। साभार- डेली मेल