इसके बावजूद कन्हैया का उनके घर पर आना जाना कम नहीं हुआ। अंशुल के पिता इस बात का बिल्कुल विरोध नहीं कर पाते थे। कुछ दिन बाद ही अंशुल और उसकी पत्नी में आपसी मतभेद हुआ और वह अपने मायके में चली गई। कुछ दिन बाद आपसी बातचीत के बाद वह वापस आई, लेकिन फिर चली गई। डेढ़ माह पहले मई में दोनों पक्षों की पंचायत हुई और इसमें अंशुल के साथ रहने से उसकी पत्नी ने साफ इंकार कर दिया।