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सुरेंद्र नागर के बाद कुछ और बड़े नेता होंगे बीजेपी में शामिल, पढ़ें क्यों सपा और बसपा से है नाराजगी?

Sun, 11 Aug 2019 10:58 AM IST
शाहरुख खान एसएस अवस्थी, अमर उजाला, नोएडा
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भाजपा में शामिल हुए सुरेंद्र सिंह नागर - फोटो : सोशल मीडिया
सपा के पूर्व राज्यसभा सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहे सुरेंद्र नागर के भाजपा में शामिल होने से राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। विशेषकर गौतमबुद्धनगर व बुलंदशहर की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है। जल्द ही सपा के कुछ और बड़े नेता भाजपा में जा सकते हैं, इसकी अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि क्षेत्रीय सपा की राजनीति में नेताओं की कमी हो गई हो गई, यही हाल बसपा का भी होता जा रहा है। भाजपा खुश है कि उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक नया गुर्जर बिरादरी का नेता मिल गया है।

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भाजपा में शामिल हुए सुरेंद्र सिंह नागर - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, सुरेंद्र सिंह गौतमबुद्धनगर व बुलंदशहर में गुर्जर बिरादरी के बड़े नेता माने जाते हैं। 2009 में भाजपा प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा को हराकर गौतमबुद्धनगर लोकसभा के पहले बसपा से सांसद रह चुके हैं। इसके बाद दो साल पहले सपा में शामिल होकर राज्यसभा सांसद बन गए। सबसे बड़ी बात यह रही कि सपा मुखिया अखिलेश यादव के काफी करीबी रहे, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान ही उनका सपा से मोहभंग हो गया था। नागर ने बताया कि भाजपा सरकार बनते ही पीएम नरेंद्र मोदी ने पहले संबोधन में सबका विश्वास जीतने की बात कही थी, उससे मैं काफी प्रभावित हुआ। 

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surendra singh nagar - फोटो : ट्विटर
इसके बाद संसद सत्र में जम्मू कश्मीर के अनुच्छेद 370 के हटाने की घोषणा से वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से काफी प्रभावित हुए। अनुच्छेद 370 हटने से वहां के गुर्जरों को आरक्षण समेत तमाम लाभ मिलेंगे। जानकारों की माने तो लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने दूसरे दलों में खूब सेंध लगाई थी। पहले बसपा के मंत्री रहे वेदराम भाटी, नोएडा से विधानसभा के प्रत्याशी रहे रविकांत मिश्रा समेत कुछ अन्य बसपा नेताओं को पार्टी में मिला लिया था। 

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surendra singh nagar - फोटो : ट्विटर
सपा के एमएलसी नरेंद्र भाटी के भाई पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बिजेंद्र भाटी समेत कई नेता पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए थे। दूसरे दल कमजोर होने का लाभ डॉ. महेश को मिला और रिकॉर्ड मतों से जीत हुई। सूत्र बताते हैं कि सुरेंद्र सिंह नागर ने गौतमबुद्धनगर व बुलंदशहर क्षेत्र में बसपा और सपा की राजनीति की है। उनकी दोनों दलों में अच्छी पैठ है। बताया जाता है कि शीघ्र ही सपा के कई और नेता पार्टी को अलविदा कहने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी रूपरेखा तय हो चुकी है। यही सिलसिला पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होना है।
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फाइल फोटो
सपा और बसपा से नाराजगी क्यों
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि सपा मुखिया अखिलेश यादव को जब से बसपा सुप्रीमो मायावती ने गठबंधन तोड़ झटका दिया है, तभी से वह परेशान हैं और पार्टी के पदाधिकारियों से लेकर कार्यकर्ताओं से संवाद नहीं हो पा रहा है। ऐसा ही कुछ हाल बसपा नेताओं का है। वह पार्टी सुप्रीमो से अपनी बात कहना चाहते हैं लेकिन उन्हें स्थानीय स्तर के नेता वहां तक पहुंचने नहीं दे रहे हैं। राजनीति में अपना भविष्य देखते हुए सपा नेताओं का सुझाव भाजपा की तरफ हो रहा है।
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