टेंट में रहने को मजबूर लोग
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पानी हमारे घरों के इतने करीब आ गया है कि रात को नींद नहीं आती। बच्चे डर रहे हैं। प्रशासन ने एक बार भी नहीं पूछा कि हमें क्या चाहिए। राहत शिविर का नाम सुनते हैं, लेकिन वहां खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं। अब किराए पर कमरा लेना पड़ेगा, लेकिन कमाई पहले ही ठप है। - ब्रह्म पाल खटाना, प्रधान, पुराना उस्मानपुर