कई विभागों की टीम ने किया उपचार डॉ. धीर ने बताया कि मामला काफी चुनौती पूर्ण था। इसलिए यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों से सलाह ली गई। जब ऑपरेशन शुरू हुआ तो डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शरीर के अंदर बगैर किसी चीरफाड़ के ट्यूमर को बाहर निकालना थी। यही वजह थी कि इस ऑपरेशन में डॉक्टरों को 10 घंटे का वक्त लग गया।