आपने अक्सर लोगों को ये कहते सुना होगा कि बेटियां माता पिता की हर परेशानी में बेटों से पहले खड़ी दिखाई देती हैं। ये बात तब भी सही साबित होती दिखी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अक्टूबर की रात 12 बजे से 500 और 1000 के नोटों का चलन बंद करने का ऐलान किया। (सभी फोटोः सौरभ पांडे/गाजियाबाद ब्यूरो)
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ऐसे में लोग परेशान हो गए कि आखिर दो दिन बैंक और एटीएम बंद रहने के कारण और दो बड़े नोटों का लेन-देने बंद होने से घर के छोटे-मोटे खर्च कैसे चलेंगे। वो चीजें जो सिर्फ नकद देकर ही खरीदी जा सकती हैं उनका इंतजाम कैसे होगा। ऐसे वक्त में एक गाजियाबाद के एक पिता का सहारा बनी उसकी 6 माह की बेटी।
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- फोटो : सौरभ पांडे
आप सोच रहे होंगे कि जब सभी के पास छुट्टे रुपयों का अभाव है तो एक छह माह की बेटी ने कैसे अपने पिता को इस मुसीबत से उबारा। वैसे तो घर में कुल चिल्लर व छोटे नोट मिलाकर 360 रुपए थे लेकिन एक छह माह की बच्ची वाले घर में यह पैसे बहुत कम हैं और दो दिन तक बिना कैश के गुजारा भी काफी मुश्किल है।
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- फोटो : सौरभ पांडे
ऐसे कठिन समय में घरवालों को याद आई बेटी ऋषिका की गुल्लक। पहले तो मन में संकोच हुआ कि इतनी छोटी बेटी की गुल्लक कैसे तोड़ी जाए लेकिन मन को दबाकर और बच्ची की जरूरतों को देखते हुए पिता ने बेटी गुल्लक तोड़ी जिसमें से 100-100 के 28 नोट निकले। पिता का कहना है कि बेटी की बदौलत अब वो दो दिनों के लिए अमीर हैं और सच में बेटियां हर मुसीबत में साथ देने वाली होती हैं।
गाजियाबाद में ऐसी ही एक और घटना सामने आई जहां बच्चों की गुल्लक तोड़कर अगले दो दिनों के नकद की व्यवस्था की गई। अचानक आई इस परेशानी का सामना करने के लिए आज बहुत से घरों में गुल्लक तोड़े गए जिससे रोजाना का काम हो सका।