विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने तैयारियां काफी पहले से ही शुरू कर दी हैं। अमूमन टिकट बंटवारे और चुनाव लड़ने में हीलाहवाली के लिए बदनाम कांग्रेस इस बार मुख्यमंत्री के रूप में शीला दीक्षित को उतार चुकी है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों जब प्रशांत किशोर उर्फ पीके को यूपी चुनाव की बागडोर सौंपी गई तो उनके ही सुझाव पर मुख्यमंत्री के लिए शीला दीक्षित का ही नाम सामने लाया गया।
शीला के लिए नोएडा या फिर लखनऊ क्षेत्र से चुनाव लड़ने का विकल्प रखा गया है। वहीं, शीला का सुझाव नोएडा के कांग्रेसियों ने भी हाईकमान को दिया था कि अगर वे नोएडा से चुनाव लड़ती हैं तो पार्टी को लाभ मिलेगा। बता दें कि मायावती से लेकर अखिलेश यादव तक कोई भी मुख्यमंत्री अपने शासनकाल में नोएडा नहीं आया है।
माना जाता है कि जो भी नेता यहां आएगा उसकी सीट छिन जाएगी अगर ऐसे में शीला दीक्षित नोएडा से जीतती हैं और मुख्यमंत्री बनती हैं तो लोगों की यह धारणा भी टूट जाएगी।
तर्क दिया गया है कि यहां पर शहरी वोटर ज्यादा हैं
सोनिया गांधी के साथ शीला दीक्षित
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शीला के नोएडा से चुनाव लड़ने के पीछे तर्क दिया गया है कि यहां पर शहरी वोटर ज्यादा हैं। किसी भी पार्टी ने फिलहाल ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं उतारा है। सपा से ठाकुर प्रत्याशी अशोक चौहान हैं।
बसपा से अभी कोई प्रत्याशी घोषित नहीं है। भाजपा से विधायक विमला बाथम हैं। अगर भाजपा की पॉलिसी यह रही जिस सीट पर पार्टी का विधायक है, उसे न बदला जाए तो भाजपा की तरफ से वैश्य प्रत्याशी ही रहेगा।
अगर शीला ब्राह्मण प्रत्याशी के रूप में अकेली रहती हैं पार्टी को विश्वास है कि फायदा मिलेगा। दिल्ली से नोएडा की सीमा मिली हुई है, इसका भी पार्टी को लाभ होगा।
2017 में बदली हुई होंगी परिस्थितियां
शीला दीक्षित
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वहीं, रणनीतिकारों की मानें तो नोएडा भाजपा की सीट है। 2012 में नए परिसीमन के बाद जब नोएडा नई सीट बनी तो सबसे पहले विधायक बनने का श्रेय भाजपा से डॉ. महेश शर्मा को जाता है।
डॉ. महेश 2014 के लोकसभा चुनाव में सांसद बने तो सीट खाली होने पर विमला बाथम चुनाव जीती थीं। विमला खुद के प्रयास से नहीं जीतीं, विमला की जीत का श्रेय डॉ. महेश शर्मा को ही जाता है।
हालांकि, 2017 के चुनाव की परिस्थितियां बदली हुई होंगी। सपा, भाजपा, कांग्रेस और बसपा इस बार अपनी पूरी ताकत लगा रही है और मुकाबला कांटे का होने वाला है।
अगर शीला दीक्षित नोएडा से चुनाव लड़ती हैं तो उन्हें प्रचार करने की भी जरूरत नहीं होगी और वह जीत जाएंगी, क्योंकि नोएडा और दिल्ली के लोग उन्हें जानते हैं। नोएडा से 60 फीसदी लोग हर रोज दिल्ली जाते हैं। नोएडा के लोगों ने दिल्ली का विकास देखा है।- कृपाराम शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेसी