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अपनी आखिरी सांस तक पार्टी में प्राण फूंकने में जुटी रहीं शीला, आज भी गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस

Sun, 21 Jul 2019 09:38 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि देने पहुंची सोनिया गांधी
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अंतिम सांस तक प्रदेश कांग्रेस के कायाकल्प के लिए जुटी रहीं। लोकसभा चुनाव से पहले संकट मोचक के तौर पर उन्हें दिल्ली कांग्रेस की बागडोर सौंपी गई और अगामी विधानसभा चुनाव भी उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जाना था, लेकिन शीला दीक्षित के निधन के बाद गुटबाजी की शिकार प्रदेश कांग्रेस पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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कन्नाैज में एक कार्यक्रम के दौरान शीला दीक्षित की तस्वीर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
दरअसल दिल्ली में कांग्रेस अपने नाजुक राजनीतिक दौर से गुजर रही हैं। ऐसे में शीला दीक्षित जैसी दिग्गज व दिल्ली के विकास के तौर पर जाने वाली महिला नेता का निधन पार्टी के लिए अपूर्णीय क्षति है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको के बीच शीला दीक्षित गुट के साथ जबरदस्त खींचतान चल रही है।
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शीला दीक्षित का पार्थिव शरीर - फोटो : Amar ujala
यह खींचतान तब खुलकर सामने आई थी, जब शीला दीक्षित ने दिल्ली के सभी ब्लॉक स्तर के नेताओं को बदलने का निर्णय लिया था। इसके तुरंत बाद  चाको ने शीला दीक्षित के आदेश को रद्द कर दिया था।वह प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद दिल्ली में संगठन को मजबूत करना चाहती थीं, लेकिन अब एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस में बिखराव की स्थिति बनती दिख रही है।

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शीला दीक्षित के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस में ले जाते हुए - फोटो : Amar ujala
लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस को उम्मीद जगी थी कि शीला दीक्षित के नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनाव में अपने विरोधी दलों के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन उनके निधन के बाद गुटबाजी और बढ़ने की आशंका है।
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पीसी चाको और शीला दीक्षित - फोटो : ANI
सबसे बड़ी बात है कि पार्टी अपने सभी कद्दावर नेता, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, पूर्व मंत्री अरविंदर सिंह लवली, जयप्रकाश अग्रवाल को पार्टी की कमान सौंप कर आजमा चुकी हैं। अब पार्टी आलाकमान को प्रदेश की बागडोर किसे सौंपी जाए इसके लिए भारी मशक्कत करनी होगी। 
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