दिल्ली के बाबू जगजीवन राम अस्पताल में उस समय सभी की आंखें नम हो गई जब दो मासूम और उसके पिता के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिवार को सौंपा गया। मासूमों के शवों को देखकर मां अपने को रोक नहीं पाई और उन्हें कलेजे से लगा लिया। परिवार वाले उनको संभालने में लगे थे वहीं बेटा-बेटी और पति को खोने के बाद रुपाली का रो-रोकर बुरा हाल था और वह बार बार कह रही थी कि उन्हें बच्चों से दूर मत करो। वह समझ नहीं पा रही थी कि यह सब कैसे हो गया। इससे पहले परिवार ने तीनों का नेत्रदान करने का फैसला किया।
विज्ञापन
2 of 6
मृतकों की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
शालीमार बाग के बीजी ब्लॉक में रहने वाले मधुर मलानी ने रविवार को हैदरपुर मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन के सामने छलांग लगाकर जान दे दी थी। वहीं उनके छह साल के बेटे श्रेयांश और चौदह साल की बेटी समीक्षा का शव घर में बिस्तर पर पड़ा मिला था। आशंका जताई गई कि मधुर ने अपने बच्चों की हत्या करने के बाद खुदकुशी की है। सोमवार सुबह शालीमार बाग थाना पुलिस ने बाबू जगजीवन राम अस्पताल के मोर्चरी में दोनों बच्चों का पोस्टमार्टम कराया।
विज्ञापन
3 of 6
मौके पर जमा भीड़ और पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
वहीं आजादपुर मेट्रो स्टेशन पुलिस ने इसी मोर्चरी में मधुर के शव का पोस्टमार्टम कराया। करीब पौने तीन बजे परिवार को शवों को सौंप दिया गया। बच्चों के शवों को देखकर वहां मौजूद उनकी मां रुपाली व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बच्चों के दादा दिनेश मलानी भी अपने को रोक नहीं पाए। दिनेश मलानी ने बताया कि कारोबार की वजह से मधुर डिप्रेशन में था। उनका इलाज भी चल रहा था। लेकिन उन्हें यह विश्वास नहीं हो पा रहा है कि मधुर इतना खौफनाक कदम उठाएंगे।
4 of 6
मौके पर जमा भीड़
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की तहकीकात
रविवार को शालीमार बाग के उस मकान में क्या हुआ इसकी जांच में पुलिस जुट गई है। पुलिस का कहना है कि शुरूआती जांच रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि बच्चों की हत्या गला घोंटकर की गई है। लेकिन पुलिस को मधुर के पास से या फिर उनके घर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। खुदकुशी के दौरान मधुर का फोन टूट गया है लेकिन पुलिस उनके फोन को अपने कब्जे में कर जांच में जुटी है। पुलिस फोन का लोकेशन खंगाल रही है। मधुर सोशल साइट पर भी काफी सक्रिय थे जिसकी जानकारी इक्कठा कर पुलिस तफ्तीश में जुटी है। अभी तक की छानबीन के बाद पुलिस को अंदेशा है कि अपने रहन सहन को बरकरार नहीं रख पाने की वजह से मधुर मिलानी ने इतना बड़ा कदम उठाया। उनके बच्चे नामी स्कूल में पढ़ते थे। कारोबार में घाटा होने की वजह से वह फीस नहीं दे पा रहे थे। जिसकी वजह से वह काफी तनाव में आ गए थे।
विज्ञापन
5 of 6
मौके पर जमा भीड़
- फोटो : अमर उजाला
परिजनों ने किया तीनों का नेत्रदान
पोस्टमार्टम से पहले परिवार वालों ने तीनों का नेत्रदान करने का फैसला किया। अब उनकी आंखों से दूसरे दुनिया को देख पाएंगे। परिजनों ने बताया कि मधुर हमेशा से ही दूसरों की मदद करने वाला व्यक्ति था। वह सामाजिक कार्यों में आगे रहता था। इसलिए परिजनों ने तीनों का नेत्रदान करने का फैसला किया ताकि उनकी आंखों से किसी के अंधेरी दुनिया रोशन हो सके।
डिप्रेशन से बचने के लिए मोटिवेशन स्पीच का क्लास अटैंड करते थे
परिवार से पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि मधुर करीब दो साल से बीमार थे और उनका इलाज चल रहा था। उनका रेगमाल का कारोबार था। साथ ही वह ऑन लाइन सेलिंग कंपनी से जुड़े थे। कारोबार में घाटा होने के बाद से वह डिप्रेशन में चले गए थे। इलाज के साथ साथ वह मोटिवेशन स्पीच का क्लास अटैंड करते थे। लेकिन आर्थिक तंगी से वह पूरी तरह टूट चुके थे।