साइबर सिटी में बिक रहा पैकेट बंद व खुला दूध मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। बीते एक वर्ष में स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर के विभिन्न क्षेत्रों से खुले व पैकेट बंद दूध के लिए सैंपल में 40 फीसदी फेल हो गए।
विज्ञापन
2 of 4
synthetic milk, mewat
- फोटो : अमर उजाला
फेल हुए सैंपलों में नामी ब्रांडेड कंपनियों के दूध भी शामिल हैं। अधिकारियों की मानें तो यह दूध लोगों के पीने लायक नहीं है। इसे पीने से शहरवासी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिला खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी केके शर्मा के मुताबिक, मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। बीते वर्ष इस अभियान के तहत शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से पैकेट बंद व खुले दूध के करीब 16 सैंपल इकट्ठे किए गए थे।
विज्ञापन
3 of 4
दूध चेक
- फोटो : SELF
इन सैंपलों में अमूल, मदर डेयरी, गोपालजी जैसी ब्रांडेड कंपनियों सहित अन्य डेयरियों पर बिकने वाले खुले दूध के सैंपल भी शामिल थे। शर्मा की मानें तो विभाग द्वारा की गई जांच में खुला दूध तो मानकों पर खरा उतरा, लेकिन ब्रांडेड कंपनियों के सैंपल फेल पाए गए हैं। जिसे लेकर अतिरिक्त उपायुक्त की कोर्ट में मिलावटखोरों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है।
कंपनियों की ओर से दूध की गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए खुद की लैब भी स्थापित की गई हैं। जहां दूध बनते समय उसकी जांच की जाती है। अब इन कंपनियों के सैंपलों का विभाग की जांच में फेल होना इन पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. नवीन कुमार ने कहा, मिलावटी दूध का सेवन सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इससे एक्यूट गेस्ट्रोएंट्राइटिस होने के साथ ही अन्य बीमारियां भी होने का खतरा होता है।