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रायन : नए जुवेनाइल जस्टिस लॉ में फिट बैठता है केस, किया जा सकता है आरोपी के साथ बालिग जैसा व्यवहार

Wed, 15 Nov 2017 10:23 PM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
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ryan international - फोटो : सुदर्शन झा
प्रद्युम्न हत्याकांड में आरोपी छात्र के साथ वयस्क के तरह व्यवहार किया जाए या नाबालिग की तरह। इस मामले में पेंच फंस सकता है। नए जुवेनाइल जस्टिस कानून में यह अधिकार जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को दिया गया है।
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ryan international - फोटो : सुदर्शन झा
2016 में संशोधित किए गए जुवेनाइल जस्टिस कानून में गंभीर अपराध में संलिप्त किशोर पर सामान्य अदालत में बालिग की तरह मुकदमा चलाने का अधिकार दिया गया है, लेकिन इसे तय करने का अधिकार जेजे बोर्ड को ही दिया गया है।
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ryan school - फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला
बता दें कि 08 सितंबर को हुए प्रद्युम्न की हत्या के मामले में सीबीआई द्वारा हिरासत में लिए गए 11वीं कक्षा के छात्र के साथ सामान्य वयस्क के तरह केस चलाने की मांग प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने की है। इस मामले में उन्होंने वकील सुशील टेकरीवाल के सामने याचिका भी डाली है।

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ryan school - फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला
कानून विशेषज्ञों की कहना है कि नए कानून के तहत बोर्ड आरोपी किशोर की मानसिक क्षमता यानी अपराध की प्रकृति और परिणामों के प्रति उसकी समझ, अपराध की परिस्थितियां और मंशा आदि जांचने के बाद यह फैसला करेगा कि मुकदमा बोर्ड में चलना चाहिए या सामान्य अदालत में।
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प्रद्युम्न की हत्या कांड के आरोपी को फरीदाबाद बाल सुधार गृह में लाया गया । - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ वकील पीयूष तिवारी कहते हैं कि बोर्ड सभी परिस्थितियों का आकलन करेगा। जिस बच्चे की हत्या की गई, उससे आरोपी की कोई दुश्मनी नहीं थी।
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प्रद्युम्न की हत्या कांड के आरोपी को फरीदाबाद बाल सुधार गृह में लाया गया । - फोटो : अमर उजाला
ये सारी चीजें और परिस्थितियां अपराध को गंभीर अपराध की श्रेणी में लाती हैं। ऐसे में बोर्ड का अधिकार है कि उसे सामान्य अदालत में ट्रांसफर कर दिया जाए।
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varun thakur - फोटो : सुदर्शन झा
प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर के वकील सुशील टेकरीवाल का कहना है कि जिस उद्देश्य से कानून में संशोधन किया गया था, उसमें यह केस पूरी तरह फिट बैठता है। यह जघन्य अपराध है।
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ryan international - फोटो : सुदर्शन झा
इस मामले में आरोपी छात्र ने बर्बरता से हत्या को अंजाम दिया है। यहां एक ऐसे असहाय मासूम की हत्या हुई है जो अपना बचाव नहीं कर सकता था। अगर यहां नया कानून लागू नहीं हुआ तो कानून में संशोधन करने का उद्देश्य ही निष्फल हो जाएगा।
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