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प्यार का पैगाम देने का इस युगल ने खोजा अनूठा रास्ता, पहुंचे भारत

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विश्व में बढ़ती अशांति से चिंतित रूस के एक युवक ने यूक्रेन की महिला मित्र के साथ विश्व शांति का पैगाम देने का फैसला किया और साइकिल की सवारी पर निकल पड़े दुनिया को प्यार का पाठ पढ़ाने। दोनों सात देशों की यात्रा कर भारत पहुंचे। शनिवार को यमुना एक्सप्रेसवे से गुजरते हुए जेवर में रुके। 15 देशों की यात्रा कर विश्व शांति के लिए लोगों से अपील करेंगे। (फोटो व स्टोरी : मनोज कुमार शर्मा/अमर उजाला,ग्रेटर नोएडा)
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प्यार का पैगाम देने का इस युगल ने खोजा अनूठा रास्ता, पहुंचे भारत

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खास बात यह है कि रूस और यूक्रेन के संबंधों में कड़वाहट है। ऐसे में यूक्रेन की एला (23) और रूस के निकेता (28) प्यार की मिसाल कायम कर दुनिया भर में शांति लाना चाहते हैं।
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यूक्रेन, रूस, कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान, तजाकिस्तान, अफगानिस्तान और एक अन्य देश में साइकिल यात्रा करने के बाद बुधवार को दिल्ली पहुंचे।

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दोनों शनिवार को जेवर पहुंचे, जहां इंटरचेंज पर स्थानीय लोगों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि छह माह तक वह भारत में रहकर साइकिल यात्रा से लोगों को विश्व शांति का पैगाम देंगे।
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इसके बाद नेपाल, चीन, तहरान, मलेशिया, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी विश्वशांति के लिए साइकिल यात्रा करेंगे। इसके बाद अपने देश लौटेंगे। फिर पैसा कमाने के बाद दूसरे देशों की यात्रा पर निकलेंगे।
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दिन में 60 किलोमीटर का सफर : साइकिल यात्र में दिनभर में 60 किलोमीटर चलते हैं। साइकिल जीपीएस और इंटरनेट से लैस हैं और सभी उपकरणों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय पुलिस को जानकारी देने के बाद कैंप करते हैं। फंड की कमी की वजह से खाना स्थानीय लोगों के साथ ही खाते हैं।
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इंटरनेट से मिली प्रेरणा : दुनिया भर में फैली अशांति और लगातार बिगड़ते हालात पर इंटरनेट पर लगातार पढ़ने के बाद उन्हें विश्व शांति फैलाने की प्रेरणा मिली। दोनों की ही दोस्ती तीन साल पहले फेसबुक के जरिए हुई थी। इसके लिए वे किसी समाजसेवी संगठन की भी मदद नहीं ले रहे हैं।
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नौकरी छोड़कर लिया फैसला : एला और निकेता ने नौकरी छोड़कर इस मुहिम पर चलने का फैसला लिया। एला यूक्रेन में सरकारी आर्किटेक्ट की नौकरी करती थी। उन्होंने जो कुछ कमाया उसे अब इस मिशन पर खर्च कर रही हैं। वहीं रूस के निकेता पेशे से सिपमैन हैं। वह भी अपनी कमाई इस मुहिम पर खर्च कर रहे हैं। अन्य स्रोतों से उन्हें कोई फंड नहीं मिल रहा।
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