लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीटों पर बीजेपी की करारी हार से साफ हो गया है कि बुआ-भतीजे का ये सियासी रिश्ता आगे भी जारी रहा तो आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल हो सकती है।
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- फोटो : पीटीआई
सपा सचिव रामगोपाल यादव ने भी आज दिल्ली में माना है कि जिस तरह के नतीजे आए हैं उनसे जाहिर है कि बसपा से दोस्ती का फायदा मिला है।
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keshav prasad maurya
- फोटो : amar ujala
पश्चिमी यूपी में दलित और मुस्लिम वोटर ज्यादातर सीटों पर निर्णायक कारक हैं। फूलपुर में बाहुबली अतीक अहमद को जिस तरह 30 हजार से भी कम वोट मिले हैं उससे जाहिर है कि मुस्लिम मतदाताओं में ये संदेश गया है कि यह महज वोट काटने उतरे थे। लिहाजा मुस्लिमों ने भी उनकी जगह सपा उम्मीदवार को वोट दिया जो इस जीत में अहम साबित हुआ।
विधानसभा चुनाव में पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुस्लिम वोट सपा की जगह बसपा को गए थे। ऐसे में मुस्लिम, दलित और पिछड़ी जाति का गठबंधन बनता है तो भाजपा को 2019 में लोकसभा चुनाव में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।