पिछले दिनों हरियाणा के यमुनानगर में बारहवीं के छात्र ने प्रिंसिपल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना ने दिल्ली के स्कूलों के प्रिंसिपल को भी चौकन्ना कर दिया है।
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स्कूलों का मानना है कि लगातार न पढ़ने वाले और अनुशासनहीन छात्रों से स्कूल निपट सकते हैं, बस इसमें स्कूलों को माता-पिता का सहयोग मिलना जरूरी है। बच्चे की हिंसक प्रवृति को काउंसलिंग के माध्यम से रोका जा सकता है।
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counseling
डीएवी स्कूल के प्रिंसिपल रमाकांत तिवारी कहते हैं कि इस घटना के सामने आने के बाद केवल बच्चे को ही दोष नहीं दिया जा सकता। बच्चे कच्ची मिट्टी हैं, उन्हें जैसा रूप देंगे वैसा ढल जाएंगे।
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counseling
उनका कहना है कि स्कूल ऐसे बच्चों को अनुशासित बना सकते हैैं, लेकिन इसमें उन्हें माता-पिता का सहयोग चाहिए। शिक्षकों व अभिभावकों के बीच एक दूरी बनती जा रही है। इस दूरी को पाटने की जरूरत है।
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counseling
बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की काउंसलिंग भी जरूरी है। सबसे पहले तो शिक्षक व अभिभावक को बच्चे के मन की व्यथा सुनना जरूरी है।
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family
वर्तमान समय में अभिभावकों व शिक्षकों को बच्चों का मित्र बनकर काम करना होगा। यह ध्यान रखना होगा कि मित्र बनने से वह अपने मन की बात कहते हैं और निश्चित रूप से ऐसे बच्चों में बदलाव आता है।
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रोहिणी स्थित माउंट आबू स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. ज्योति अरोड़ा कहती हैं कि बच्चे को समझने और सुधारने के लिए स्कूलों को अभिभावकों का साथ मिलना जरूरी है।
अभिभावक व शिक्षक साथ मिलकर काम करें, तो ऐसे बच्चों की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। सकारात्मक सोच रखना भी जरूरी है। स्कूलों के साथ अभिभावकों को भी अपने बच्चे पर निगाह रखनी होगी। घर पर भी बच्चे की मनोस्थिति को समझना होगा।