शुक्रवार को तेज झुलसाती गर्मी से लोग बेहाल रहे। मार्च में इससे भी अधिक पारा 2018 में 29 मार्च को 38.6 और 2017 में 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 2011 से 2016 तक मार्च में कभी भी अधिकतम तापमान इतना ऊपर नहीं गया। इस दौरान तापमान 32 डिग्री से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा।
मौसम विभाग के अनुसार 30 अप्रैल को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होने की संभावना है। हालांकि इससे तापमान में राहत नहीं मिलेगी। 31 मार्च और 1 अप्रैल को तेज सतही हवाएं चलने के कारण अधिकतम तापमान 2 से 3 डिग्री गिरने की संभावना है। उत्तर पश्चिमी भारत में अगले 48 घंटों में अधिकतम तापमान में अधिक परिवर्तन नहीं होने की संभावना है। उसके बाद अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी होनी शुरू होगी।