प्रद्युमन को क्या पता था कि शुक्रवार उसकी जिंदगी का आखिरी दिन होगा। सुबह जब घर से निकला था तो वह बहुत खुश था। वह अपनी मम्मी से कुछ कहकर गया था जिसे बताते-बताते वह रोने लग रही हैं और रोते-रोते बेहोश हो जा रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने जो दावा किया है वो इस केस को एक नया मोड़ दे सकता है।
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- फोटो : अमर उजाला
प्रद्युमन की मां का दावा है कि उनके बाबू(प्रद्युमन) ने कुछ ऐसा देख लिया था जिसकी वजह से उसकी हत्या की गई। उन्होंने शुक्रवार के बारे में बताते हुए कहा कि कल मेरे बाबू के एक सहपाठी का जन्मदिन था। इसलिए वह घर से चॉकलेट लेकर निकला था। स्कूल जाते वक्त वह बहुत खुश था। वह बोल रहा था कि वह अपने दोस्त के साथ खूब मस्ती करेगा, लेकिन जब खबर आई तो परिवार के रौंगटे खड़े हो गए। प्रद्युमन की मां संतोष का रो-रोकर बुरा हाल है।
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बिहार के मधुबनी से ताल्लुक रखने वाले प्रद्युमन के पिता वरुण ठाकुर बीते करीब 13 वर्षों से गुरुग्राम में है। यहां ओरियंट क्राफ्ट में बतौर क्वालिटी मैनेजर के तौर पर काम करते थे। प्रद्युमन के अलावा उनकी एक बेटी (विधि) भी है।
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रोजाना की तरह बेटे-बेटी को स्कूल छोड़कर घर से काम के लिए निकलते थे, लेकिन शुक्रवार को जब घर से फैक्ट्री के लिए निकले तो आधे रास्ते में खबर मिली कि उनके बेटे की तबीयत खराब है। तत्काल वह अस्पताल के लिए निकले। जब आर्टिमिस अस्पताल के रास्ते में बच्चे को देखा तो उनकी सांसें रूक गई।
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बच्चे के पिता वरुण ठाकुर ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वरुण का कहना है कि स्कूल प्रशासन ने उन्हें शुरुआत में बच्चे की मौत के बारे में जानकारी नहीं दी।
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उन लोगों ने मुझे बताया कि प्रद्युमन की तबियत अचानक खराब हो गई है। उन लोगों ने मेरे बच्चे का ख्याल नहीं रखा। अगर उसे समय से अस्पताल ले जाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। मैंने सुबह उसे स्कूल छोड़ा था तो वह बहुत खुश था।
(फोटो- गुरुग्राम रायन इंटरनेशनल स्कूल भौंडसी के दूसरे गेट के पास की टूटी बाउंड्री से कोई भी आ जा सकता है)
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कल प्रद्युमन की मां तीन घंटे में सात बार बेहोश हुईं वहीं आज भी वह कई बार बेहोश हो चुकी हैं। मां रोते हुए कहती है मेरा बाबू चॉकलेट लेकर गया था। आखिर क्या बिगाड़ा था किसी ने? लाडले की तस्वीर लेकर बार-बार जमीन पर गिर जाती है। साथ स्कूल निकली पांचवीं कक्षा की विधि जब अपने भाई को खून से लथपथ देखा, तब से उसके आंसू भी रुक नहीं रहे थे।
वरुण के भाई प्रदीप कहते हैं उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। बच्चा बहुत ही मिलनसार था। पढ़ने-लिखने में भी अच्छे था। जब कक्षा के दूसरे छात्रों को जरुरत होती थी तो वह उसकी कॉपी घर से भी ले जाते थे।