रायन स्कूल के सीसीटीवी फुटेज में किसी छात्र को सबसे पहले उस बाथरूम से निकलते देखा गया जहां प्रद्युम्न का शव मिला। फुटेज साफ नहीं था, इसलिए सीबीआई ने इस दिशा में सघन जांच की। यही फुटेज गुरुग्राम पुलिस के पास भी था। लेकिन पुलिस उसे नजरअंदाज करते हुए अपनी जांच बस कंडक्टर की तरफ ले गई।
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- फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला
सूत्रों के मुताबिक पहला शुबहा अशोक कुमार द्वारा हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू पर जाता है। पुलिस के मुताबिक चाकू बस के टूल बॉक्स में था, जो छह महीने से वहीं पड़ा हुआ था। हत्या में गिरफ्तार आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार चाकू को बाथरुम में धोने ले गया था।
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वहीं उसने प्रद्युम्न सेकुकर्म की कोशिश की और विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी। जबकि बरामद चाकू नया दिख रहा था और उसके लकड़ी के हत्थे पर कंपनी का स्टीकर तक चिपका हुआ है। सूत्रों के मुतबिक पहले बस के ड्राइवर ने बयान दिया था कि बस में टूल बॉक्स था ही नहीं। बाद में पुलिस के दबाव में उसने टूल बॉक्स होने की बात स्वीकार की।
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सूत्रों ने बताया कि स्कूल के माली का बयान भी काफी अहम है, जिसे पुलिस और स्कूल प्रशासन ने तवज्जो नहीं दी। माली ने कहा था कि जब प्रद्युम्न को बाथरूम से उठाने की कोशिश की जा रही थी, तब उसने अशोक को पास लगे कूलर के पीछे के गलियारे से आते देखा था।
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यह गलियारा मुख्य रास्ते की विपरीत दिशा में है। उसकी कमीज पर कोई खून का धब्बा नहीं था। जबकि पुलिस का दावा है कि अशोक ने उतनी देर में खून को साफ कर लिया होगा। प्रद्युम्न हत्या के तीन मिनट पहले बाथरूम में गया था। वारदात के करीब दो से पांच मिनट बाद ही दूसरे बच्चे ने प्रद्युम्न को वहां पड़ा देख इसकी जानकारी टीचर को दी।
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- फोटो : अमर उजाला
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक जांचकर्ताओं को शक है कि इस छात्र के बारे में स्कूल प्रशासन को जानकारी थी। बाथरूम में एक बिना सलाखों की खिड़की है जिससे कोई भी आसानी से आ जा सकता है। पुलिस ने इस संभावना को ज्यादा तवज्जो नहीं दी।
गौरतलब है कि 8 सितंबर को हुई इस घटना के बाद प्रद्युम्न के पिता पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने पर अड़े रहे। उन्होंने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। आखिरकार हरियाणा सरकार की गुजारिश और केंद्र के निर्देश पर 22 सितंबर को सीबीआई ने इसकी जांच अपने हाथों में ले ली थी।