फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खास खबर: प्रदूषण बढ़ा सकता है कोरोना का खतरा, शरीर के इस अंग से है सीधा संबंध

Fri, 23 Oct 2020 10:52 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद

सार

- प्रदूषण के कारण फेफड़ों में इंफेक्शन से रोग प्रतिरोधक क्षमता हो जाती है काम
- ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के रजिस्ट्रार ने लोगों को किया आगाह
विज्ञापन
1 of 5
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
फरीदाबाद का बढ़ता प्रदूषण कोरोना मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। डॉक्टरों ने इस मौसम में कोविड के साथ गैर कोविड मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डाक्टरों ने लोगों को आगाह किया है कि प्रदूषित हवा व्यक्ति के सीधा फेफड़ों (लंग्स) पर प्रभाव डालती है। इससे कोविड-19 की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। इससे कोरोना के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। उन्हें ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में इस दौरान ज्यादा संभल कर रहने की जरूरत है।
विज्ञापन

2 of 5
pollution in delhi - फोटो : अमर उजाला
एक सप्ताह से खराब हवा का दंश झेल रहे फरीदाबाद की हवा बुधवार की सुबह भी खराब श्रेणी में रही। फरीदाबाद में बुधवार दिन में पीएम 2.5 का स्तर 337 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर दर्ज किया गया, जबकि बल्लभगढ़ में पिछले तीन दिनों के मुकाबले एक्यूआई घटकर 297 पर रहा। डॉक्टरों के अनुसार प्रदूषण का स्तर बढ़ने से वायरल इन्फ्लूएंजा जैसी सांस की बीमारियां भी बढ़ जाती हैं और खराब वायु गुणवत्ता के कारण फेफड़ों में सूजन आ जाती है और इससे वायरस से संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है।
विज्ञापन

3 of 5
pollution in delhi - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में प्रदूषित हवा से और ज्यादा दिक्कत होने की आशंका है। प्रदूषित हवा सीधे व्यक्ति के फेफड़ों पर प्रभाव डालती है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। ऐसे में कोरोना का वायरस और ज्यादा ताकतवर हो जाएगा।

4 of 5
pollution in delhi - फोटो : अमर उजाला
इस समय कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों और गैर कोविड मरीजों को अपना ध्यान रखना होगा। भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें। मरीजों के फेड़फों पर प्रदूषण का असर होने से कोविड से लड़ने की क्षमता कम हो जाएगी। जो कोविड पहले कम असरदार था। इस समय वह और ज्यादा ताकतवर हो जाएगा। प्रदूषण बढ़ने से कोविड बढ़ेगा और उसका असर पहले की अपेक्षा ज्यादा होगा। पहले रिकवरी रेट ज्यादा था। प्रदूषण के प्रभाव से रिकवरी रेट में भी गिरावट आ सकती है। इस साल कोविड-19 का प्रकोप है। सामान्य सर्दी जुकाम की तरह प्रदूषण का स्तर बढ़ने से इस वायरस का संक्रमण बढ़ने की आशंका है। प्रदूषण बढ़ने से कोरोना के मामलों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। - डॉ. अनिल पांडे, रजिस्ट्रार, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, एनआईटी तीन

मृत्यु दर को जनसंख्या घनत्व, लोगों की नजदीकी और भारी औद्योगिक या शहरीकृत क्षेत्रों से जोड़ा गया है जहां प्रदूषण का स्तर अधिक है। उन्होंने कहा कि ये कारक त्योहारों और सर्दी के मौसम में और अधिक प्रभावशाली हो सकते हैं। विशेषकर जहां पराली जलाई जाती है। इससे वायु की गुणवत्ता बुरी तरह से प्रभावित होती है। बढ़ते प्रदूषण का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। ऐसे में कोरोना मरीजों को तनाव सहित अन्य बीमारियों से ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। - डॉ. रोहित गुप्ता, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट, फोर्टिस एस्कॉर्टस अस्पताल, फरीदाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
दिल्ली में छाई धुंध की चादर - फोटो : एएनआई
बचने के उपाय
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचे।
- धूल मिट्टी वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए।
- सांस संबंधी तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- घर से निकलते समय मास्क अवश्य लगाएं, ये हमें कोविड के साथ ही प्रदूषण से भी बचाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें