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PHOTOS: जिम्मा संभालते ही दिल्ली की बदनाम गलियों में पहुंची स्वाति

Thu, 23 Jul 2015 01:03 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष स्वाति अपनी टीम सहित बुधवार सुबह 9:30 बजे जीबी रोड पहुंची। सेक्स वर्कर से मिलने व उनकी स्थिति को परखने पहुंची आयोग की टीम ने उनसे बात करके उनकी समस्याओं की जानकारी हासिल की। खास बात यह रही कि इस दौरान जीबी रोड के दुकानदारों ने स्वाति से सीधे सवाल कर दिया कि उपराज्यपाल ने तो नियुक्ति को गलत करार दिया है, फिर किस हक से वहां आई हैं?
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कोठा नंबर 43 :  समय 11 बजे - सीनियर सिटीजन महिला 40 सालों से परिवार का बनीं सहारा
सीधी सीढ़ियां चढ़ते ही ऊपर एक कमरा दिखा। यहां करीब पंद्रह लड़कियां (सेक्स वर्कर) थीं। जिसमें 10 महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलगांना की रहने वाली थीं। यहां लड़कियों के बीच चार छोटे बच्चे भी थे। छोटे से कमरे की गैलरी में बैठी लड़कियों ने स्वाति को बताया कि वे अपनी मर्जी से यहां पहुंची हैं।
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यहां एक एक बुजुर्ग महिला भी दिखी, जो कि पिछले चालीस सालों से यहां मिलने वाले पैसे को कर्नाटक में अपने घर भेजती हैं। जिससे पूरा परिवार पल रहा है। महिला का कहना था कि अब तो याद भी नहीं कि बाहर की दुनिया कैसी होती है? बस परिवार का चेहरा दिखता है। हालांकि स्वाति के पूछने पर महिला ने बताया कि सरकार की ओर से सीनियर सिटीजन पेंशन का लाभ आज तक नहीं मिला है।

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कोठा नंबर 49 : समय दोपहर 1 बजे- तहखानों के टूटे ताले, गंदगी की भरमार
तीसरी मंजिल पर बने कमरों की हालत देखकर किसी के भी कदम ठिठक जाएं। छोटे बच्चे और कम उम्र की लड़कियां (दक्षिण भारतीय) फर्श पर बैठी हुई थीं। स्वाति ने तीन लड़कियों से उनके नाम व पता पूछे। लड़कियों ने कहा वे अपनी मर्जी से यहां आई हैं। यहां का पता जान-पहचान की महिलाओं से चला, जोकि यहां रहती थीं। यहां कमरों के अंदर दो छत दिखीं, नीचे केबिन तो ऊपर तहखाने थे। जहां जाने के लिए बाथरूम के पास से छोटी सीढ़ी बनी हुई थीं।

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अंदर ही अंदर एक-दूसरे से जुड़े हैं तहखाने- स्वाति ऊपर तहखाने जांचने के लिए चढ़ी, लेकिन यहां रेंगते हुए अंदर जाना पड़ा। कई केबिन में ताले दिखे, जिसकी चाबियां मांगने पर भी नहीं दी, जिसके बाद पुलिस की मौजूदगी में उन्हें तोड़ दिया। एनजीओ के मुताबिक, स्वाति के आने की भनक पड़ते ही अंदर ही अंदर जुड़े तहखानों से सब लड़कियां गायब हो चुकी थीं। स्वाति ने तहखानों के ताले भी खुलवाएं लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
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जख्मों संग बीमारी और बदबू का आलम- यहां कम उम्र लड़कियों के शरीर पर जख्मों के निशान भी दिखे। जब उनसे पूछा गया तो कहा सीढ़ियों से गिरने पर चोट लगी है। हालांकि यह चोट दर्शाती थी कि सीढ़ियों से गिरने नहीं, बल्कि सिगरेट से जलाने के निशान थे। अधिकतर लड़कियों का स्वास्थ्य खराब दिखा।
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स्वाति मालीवाल ने मीडिया को बताया कि बेशक लड़कियों ने जबरदस्ती की बात नहीं कबूली है, क्योंकि वे अभी हम पर भरोसा नहीं कर पा रही हैं। अधिकतर लड़कियां दक्षिण भारतीय हैं और कम उम्र की हैं। हालांकि उन्हें बेहतरी का भरोसा दिलाकर बदलाव की शुरुआत करेंगे। कई जगह तहखाने भी तोड़े गए, अंदर छह वाई तीन की केबिन में बिना हवा के कैसे कोई इंसान जी सकता है, यही देख एक महिला होने के नाते बेहद तकलीफ हुई है।
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