humayunpur fort
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सरकार की अनदेखी, लोगों ने ली सुध
स्थानीय निवासी नरेश ने कहा कि 47 सालों में इमारत देखने कोई सरकारी विभाग नहीं पहुंचा। गुंबद पर त्रिशूल भी लगा है। अंदर घंटा लटकाने वाली लोहे की पुरानी जंजीर भी है। मंदिर से घंटा चोरी हो जाने के बाद यहां ताला लगाया जाने लगा। 35 सालों से इलाके में रहने वाली महिला विजय मारवा ने कहा कि उन्होंने जगह को हमेशा मंदिर के रूप में ही देखा है। उनकी सास इस मंदिर में कीर्तन करती थीं। मंदिर की हालत खस्ता थी। सरकार ने कोई सुध नहीं ली तो लोगों ने मिलकर खुद साफ सफाई की और रंग करवाया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गुंबद के खंडहर में तब्दील होने के बाद महिलाएं दीया जलाने लगी थी। देखते देखते इसका स्वरूप मंदिर में तब्दील हो गया। कोई विवाद नहीं हुआ, मगर अब मामला राजनीतिक हो गया है।