कला और कलाकारों के लिए कठिनाई से भरे समय में उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्में कुमार संतोष एक ऐसे युवा कलाकार हैं जिनकी रंगों की दुनिया इस वक्त के रचनाकारों से बेहद अलग नजर आती है। जैसा नाम वैसा काम हर तरह का ‘संतोष। वो अपनी प्रदर्शनियों में भले ही लापरवाह हों, लेकिन उनकी पेंटिग्स में नयापन बेहद खास है।
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तस्वीरें: कुछ नया देखना है तो जरूर देखें इस कलाकार की चित्रकारी
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कुमार संतोष को कला उनके परिवार से ही मिली है, क्योंकि वो एक चित्रकार के पुत्र हैं, लेकिन वर्तमान समय में कला की उपेक्षा के प्रति पीड़ा इनकी रचनाओं में नजर आती है।
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संतोष का मानना है कि कलाकार को स्वतन्त्र होना चाहिए वो जैसा सोचता है वो वैसा रचे। यही वो चीज है जो युवा चित्रकारों को इनसे सीखनी चाहिए। इन दिनों संतोष ने अपनी युग्म नाम की गैलरी लगाई हुई है।
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कुमार संतोष के रंगों की दुनिया बेहद संवेदनशील और भावों को अपने में समेटे हुए दिखाई देती है। वो चित्रों में खोई हुई भावनाओं की तलाश करते नजर आते हैं।
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वो अपने चित्रों में किसी और की परछाईं पड़ने से बचाते नजर आते हैं। संतोष छोटे से छोटे भावों को अपने चित्रों में समेटते हैं या कहें कि सूक्ष्मता को ही चित्रों में उभारना उनकी खासियत है।
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इनके अनुसार बहुत सारे उनके चित्र ऐसे हैं जो अधूरे पड़े हैं, लेकिन कुछ चित्र ऐसे हैं जिन्हें चित्र प्रदर्शनियों में इन्होंने संजोया है।
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अमृतसर, हैदराबाद की राज्य स्तरीय दीर्घाओं समेत एकल प्रदर्शनियों और उत्तर प्रदेश की ललित कला अकादमी की तरफ से भी इस कलाकार को क्षेत्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। अमर उजाला के ‘बेटी ही बचायेगी’ पुरस्कार योजना में इनकी कलाकृति माधुरी दीक्षित को प्रतीक चिन्ह के रूप दी गई है। आजकल दिल्ली की आल इण्डिया आर्ट एण्ड क्राफ्ट सोसाईटी की कला दीर्घा में इनकी प्रदर्शनी 22 सितम्बर 2015 तक चल रही है।