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PICS: देखें दिल्ली-एनसीआर में कैसे मनी बकरीद और आखिर क्यों की जाती है कुर्बानी, पढ़ें पूरी कहानी

Sat, 02 Sep 2017 05:25 PM IST
यूनुस अलवी/अमर उजाला, नई दिल्ली/गुरुग्राम
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eid - फोटो : अमर उजाला
आज देशभर के साथ ही द‌िल्ली-एनसीआर में पूरे हर्षोल्लास से बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है। इस मौके पर द‌िल्ली की जामा मस्ज‌िद समेत अन्य मस्ज‌िदों में भी ईद-उल-जुहा(बकरीद) की नमाज पढ़ी गई। इस मौके पर बीजेपी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने भी बकरीद की नमाज अदा की। आगे की स्लाइड्स में पढ़‌िए आख‌िर क्यों आज के द‌िन दी जाती है कुर्बानी और लोगों ने कैसे मनाई बकरीद...
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eid - फोटो : ani
ईद-उल-जुहा यानि बकरीद का त्योहार केवल बकरों की कुर्बानी देने का ही नाम नहीं हैं बल्कि कुर्बानी का मकसद है अल्लाह को राजी करने के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज को भी त्याग कर देना है। इसी दिन दुनिया भर के मुसलमान अरब पहुंच कर हज करते हैं। हज की वजह से भी इस पवित्र त्योहार की अहमियत बढ़ जाती है।
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eid - फोटो : ani
अल्लाह को राजी करने के लिए जानवरों की कुर्बानी देना तो जरिया है जबकि अल्लाह को कुर्बानी का गोश्त नहीं पहुंचता है, वह तो केवल कुर्बानी के पीछे बंदों की नीयत को देखता है। अल्लाह को पसंद है कि बंदा उसकी राह में अपना हलाल तरीके से कमाया हुआ धन खर्च करे। कुर्बानी का सिलसिला ईद के दिन को मिलाकर तीन दिनों तक चलता है।

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eid - फोटो : अमर उजाला
क्या है कुर्बानी का इतिहास- इसलाम धर्म में इब्राहीम नाम के एक पैगंबर गुजरे हैं, जो मुहम्मद साहब से हजारों साल पहले पैदा हुऐ थे। जिन्हें ख्वाब में अल्लाह का हुक्म हुआ कि वे अपनी सबसे प्यारी चीज को अल्लाह की राह में कुर्बान कर दें। अल्लाह को राजी करने के लिए इब्राहीम ने बकरे से लेकर ऊंट तक की कुर्बानी दी लेकिन अल्लाह ने हर बार ख्वाब में सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने का हुक्म दिया।
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eid - फोटो : अमर उजाला
अंत में इब्राहीम को लगा कि उसका बेटा बेटे इस्माईल (जो बाद में पैगंबर हुए) ही सबसे प्यारा है। अल्लाह उसी की ही कुर्बानी मांग रहा है। यह इब्राहीम अलैही सलाम के लिए एक इंतिहान था, जिसमें एक तरफ थी अपने बेटे से मुहब्बत और एक तरफ था अल्लाह का हुक्म। इब्राहीम अलैही सलाम ने अल्लाह के हुक्म को पूरा करने के लिए अपने बेटे इस्माईल नबी की कुर्बानी देने को तैयार हो गए।
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eid - फोटो : अमर उजाला
जैसे ही इब्राहीम अलैही सलाम अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर छुरी से अपने बेटे को कुर्बान करने लगे, वैसे ही अल्लाह ने फरिश्तों के सरदार जिब्रील अमीन को जमीन पर भेजकर इस्माईल को छुरी के नीचे से हटाकर उनकी जगह एक मेमने (भेड़ का बच्चा) को रख दिया। इस तरह इब्राहीम अलैही सलाम के हाथों मेमना कुर्बान हो गया।
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eid - फोटो : अमर उजाला
जैसे ही इब्राहीम ने अपनी आंखें खोली तो वहां इस्माईल की जगह भेड़ का बच्चा कटा हुआ था तो फरिश्ता जिब्रील अमीन ने इब्राहीम को खुशखबरी सुनाई कि अल्लाह ने आपकी कुर्बानी कुबूल कर ली है और कयामत तक आने वाले सभी इसलाम के मानने वाले मालदारों पर हर साल कुर्बानी करना जरूरी कर दिया। तभी से अल्लाह को राजी करने के लिए पशुओं की कुर्बानी दी जाती है।

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कौन करें कुर्बानी- शरीयत के मुताबिक, कुर्बानी हर उस औरत और मर्द के लिए वाजिब है, जिसके पास साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े सात तौला सोना या इनके बराबर रुपया हो या फिर तीनों (रुपया, सोना और चांदी) मिलाकर सोना, चांदी के बराबर बनते हों। गरीब, मोहताज पर कुर्बानी फर्ज नहीं है।

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कुर्बानी के तीन हिस्से- कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से करने की शरीयत में सलाह है।

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एक हिस्सा गरीबों में तकसीम किया जाए, दूसरा हिस्सा अपने दोस्त अहबाब के लिए इस्तेमाल किया जाए और तीसरा हिस्सा अपने घर में इस्तेमाल किया जाए।
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तीन हिस्से करना जरूरी नहीं है, अगर खानदान बड़ा है तो उसमें दो हिस्से या ज्यादा भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। गरीबों में गोश्त तकसीम करना मुफीद है।
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