नेशनल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर मंगलवार को शहर के सभी छोटे-बड़े निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद रही। आईएमए जिला प्रधान डॉ. सुरेश अरोड़ा की अगुवाई में शहर के 400 डॉक्टरों का काफिला राजघाट दिल्ली को रवाना हुआ। निजी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। अन्य अस्पताल बंद रहने की वजह से बीके सिविल अस्पताल की ओपीडी में करीब डेढ़ गुना ज्यादा मरीज आए।
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आईएमए के जिला प्रधान डॉ. सुरेश अरोड़ा ने बताया कि देश भर के चिकित्सकों को सुरक्षा, काम की बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराने और उत्पीड़नकारी, गैर जरूरी कानून आदि खत्म किए जाने की मांग एसोसिएशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी लंबे समय से कर रही है। सरकार कुछ नए प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है जो चिकित्सकों के हित में नहीं है। इन सबको लेकर मंगलवार को दिल्ली कूच किया गया था।
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बताते चलें कि शहर में आठ बड़े निजी अस्पताल, करीब 200 नर्सिंग होम और काफी संख्या में क्लीनिक हैं। आईएमए के आह्वान पर मंगलवार को इन सभी की ओपीडी बंद रही। अस्पताल नर्सिंग होम में आज ओपीडी बंद है’ के पर्चे मुख्य दरवाजे से डॉक्टरों के चेंबर के सामने चिपकाए गए थे। अधिकतर क्लीनिक खुले ही नहीं।
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अनुमान है कि करीब साढ़े तीन हजार मरीजों को निजी अस्पतालों से लौटना पड़ा। गर्मी के मौसम में ओपीडी बंद होने की वजह से मरीज और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि सभी अस्पतालों की इमरजेंसी खुली होने की वजह से गंभीर मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हुई।
निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद होने का असर मंगलवार को सरकारी अस्पतालों में दिखाई दिया। बीके सिविल अस्पताल में मंगलवार को ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 2200 दर्ज की गई। अस्पताल में रोजाना औसतन 1400 मरीज आते हैं। आरएमओ डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि आईएमए की हड़ताल से अस्पताल की ओपीडी में अधिक मरीज आने की संभावना को देखते हुए पहले ही पूरी तैयारी कर ली गई थी। मंगलवार को करीब 2200 मरीज देखे गए।