6. ओशो पर ट्रेड मार्क
ओशो इंटरनेशनल ने यूरोप में ओशो नाम का ट्रेड मार्क ले रखा है। इस ट्रेड मार्क को एक दूसरी संस्था ओशो लोटस कम्यून ने चुनौती दी थी। बीते साल 11 अक्टूबर को जनरल कोर्ट ऑफ़ यूरोपीयन यूनियन ने ओशो इंटरनेशनल के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। ओशो इंटरनेशनल का कॉपीराइट और ट्रेड मार्क पर उठने वाले विवादों को लेकर कहना है कि वे ओशो के विचारों को शुद्ध रूप में उनके चाहने वालों तक पहुंचाता है, इसलिए ये अधिकार वे अपने पास रखना चाहते हैं। लेकिन ओशो ने ख़ुद ही कभी कहा था कि कॉपीराइट वस्तुओं और चीज़ों का तो हो सकता है लेकिन विचारों का नहीं। पुणे स्थित उनकी समाधि पर लिखी इस बात से ओशो की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है, "न कभी जन्मे, न कभी मरे। वे धरती पर 11 दिसंबर, 1931 से 19 जनवरी 1990 के बीच आए थे।"