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Oscars 2019: हापुड़ की बेटियों से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री को मिला अवार्ड, जानिए इसके बारे में सबकुछ

Mon, 25 Feb 2019 01:13 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हापुड़
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oscar - फोटो : अमर उजाला
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फिल्म की दुनिया में सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले ऑस्कर अवार्ड 2019(Oscar Award 2019) यानी एकेडमी अवार्ड 2019(Academy Award 2019) आज अमेरिका के लॉस एंजिलिस में संपन्न हुए। इस साल इन पुरस्कारों में एक भारतीय डॉक्यूमेेंट्री ने सफलता के झंडे गाड़े। यह फिल्म हापुड़ के काठीखेड़ा  गांव की महिलाओं के हौसले को बताती है। डॉक्यूमेंट्री फिल्म पीरियड. एंड ऑफ सेंटेंस ने शॉर्ट सब्जेक्ट डॉक्यूमेंट्री वर्ग में अवार्ड जीता है।

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लगभग दो साल पहले यूपी के छोटे से जिले हापुड़ में एक समाजसेवी संस्था से जुड़ी कुछ महिलाओं ने एक सपना देखा। सपना था ग्रामीण महिलाओं को माहवारी के दौरान सैनिटरी पैड इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करना। जिला मुख्यालय से लगभग सात किमी दूर गांव काठीखेड़ा से जुड़ी कुछ महिलाओं ने अपने गांव से ही इस सफर को शुरू करने की सोची।

इसके लिए गांव में एक छोटी सी निर्माण यूनिट स्थापित की गई। शुरू में कुछ दिक्कतों के बाद जब यह सफर आगे बढ़ा तो दुनियाभर में इनके हौसलों की गूंज हुई। इससे जुड़ी हापुड़ की दो बेटियां भी ऑस्कर समारोह में भाग लेने के लिए अमेरिका पहुंचीं। 
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सामाजिक संस्था एक्शन इंडिया ने काठीखेड़ा में वर्ष 2017 में सबला समिति के बैनर तले सैनिटरी पैड निर्माण यूनिट शुरू करने की योजना बनाई। संस्था से जुड़ी सुमन ने अपने गांव की महिलाओं को इसके लिए प्रशिक्षित करना शुरू किया।

पहले तो ग्रामीण महिलाओं ने इस पर बात करने में ही हिचक दिखाई। उसके बाद समस्या थी कि घरवालों को कैसे मनाया जाएगा। सात महिलाओं का एक समूह बना और परिजनों को बताया कि बच्चों से जुड़े  कुछ उत्पाद बनाने हैं और पढ़ाई के साथ दूसरे खर्च पूरा करने के लिए थोड़ी सी कमाई भी होगी। इसके बाद गांव के एक छोटे से कमरे में एक्शन इंडिया के सहयोग से पैड निर्माण यूनिट शुरू हुई।

सुमन और स्नेह - फोटो : अमर उजाला
इसमें प्रतिदिन 600 पैड बनाए जाते हैं जिसमें काम करने वाली सहायिकाओं को महीने में लगभग ढाई हजार रुपये की आमदनी होती है। इन्हीं में से राखी स्नातक तक पढ़ी हुई हैं। उनका कहना है कि पहले तो घरवालों को बताने में बहुत शर्म आती थी।

गांव में भी महिलाएं इस बारे में कम ही बातें करती थीं, लेकिन हमें पता था कि सैनिटरी पैड का इस्तेमाल जरूरी है। प्रीति भी पढ़ी लिखी हैं और उन्होंने काम के साथ-साथ दूसरी महिलाओं को इस बारे में जागरूक करना जारी रखा।

वक्त के साथ गांव के पुरुषों के सोच में भी बदलाव आया और वह अपनी ओर से आवश्यक सहयोग करने लगे। अब इस समूह में इन दोनों के अलावा स्नेह, अर्शी, रुखसाना, सुषमा और नीशू काम कर रही हैं। नीशू अभी कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। वह अभी इस काम से जुड़ी हैं। नीशू का कहना है कि उन्हें अच्छा लगता है कि जब लोग इस समिति और इसके काम के बारे में जिक्र करते हैं।
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गांव में की गई थी फिल्म की शूटिंग

oscars - फोटो : अमर उजाला
कुछ समय पहले एक्शन इंडिया संस्था के लोगों के साथ फिल्म बनाने वाले कुछ लोगों की यूनिट आई। समिति से जुड़ी युवतियों और महिलाओं का कहना है कि उनके लिए फिल्म में काम करना बिल्कुल अनोखा था। गांव के लोग भी आश्चर्यचकित थे। जब पीरियड. एंड ऑफ सेंटेंस नाम की इस डॉक्यूमेंटरी फिल्म की शूटिंग हो रही थी तो किसी को अहसास नहीं था कि इसकी धूम पूरी दुनिया में होगी। उसके बाद इसे ऑस्कर के लिए चुना गया। उसके बाद लोग गांव में आने लगे, जिससे ग्रामीण खुश हैं। एक युवा अंकित का कहना है कि उन्हें खुशी है कि उनके गांव की बेटियों ने सारे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

बहुत कठिन रहा यह सफर
संस्था की जिले की टीम लीडर शबाना का कहना है कि इसका सफर बहुत कठिन रहा है। जब गांव में यूनिट लगाई गई तो कुछ लोगों ने काफी आपत्ति जताई। यह भी कहा गया कि गांव की भोली महिलाओं को बहकाया जा रहा है। कई बार लगा कि किसी और गांव का रूख किया जाए, लेकिन गांव की सुमन के सहयोग से लोगों को मनाया गया।

महिलाओं को समझाने के लिए छुप-छुप कर बात की जाती थी। जब फिल्म बनाने वाली यूनिट ने गांव में संपर्क किया तो साल 2017 में 15-15 दिनों के लिए दो बार शूटिंग हुई। विदेशी मूल के लोगों के आने से गांव के लोग आश्चर्यचकित थे। अब जब फिल्म के बारे में इतनी चर्चा हो रही है तो अधिकांश लोग खुश हैं।
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