महज सात साल की उम्र में रमन घोष तेजी से बढ़ रहे मस्से से परेशान था। रमन के जन्म के समय से ही सिर के पीछे एक मस्सा था, जो उम्र बढ़ने के साथ ही धीरे-धीरे बढ़ते हुए तकरीबन फुटबॉल के आकार का हो गया था। फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. हरजिंदर सिंह के नेतृत्व में चिकित्सकों की एक टीम ने सर्जरी कर मस्से को हटा दिया।
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नोएडा फोर्टीस अस्पताल में 7 साल के बच्चे के सिर से एन्सेफलोसेले निकाला गया इसकी जानकारी देते डाक्टर
- फोटो : लाल सिंह
डॉक्टरों के मुताबिक असामान्य रूप से बड़े इस मस्से का वजन करीब एक किलोग्राम था। डॉ. हरजिंदर ने बताया कि मरीज का सिर जन्म के समय से ही एक तरफ झुका था। बच्चा जन्मजात टॉरकुलर ऑक्सीपिटल एन्सेफलोसेलसे पीड़ित है।
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मस्से को हटाने के लिए सर्जरी पांच घंटे तक चली। और फिर रमन को एक हफ्ते तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। रिकवरी अवधि के दौरान मरीज की स्थिति में काफी तेजी से सुधार हुआ। डॉक्टर ने बताया कि असाधारण रूप से जटिल और बेहद जोखिम वाला मामला था। यह बीमारी अनुवांशिक व पर्यावरणीय दोनों तरह से हो सकती है।
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डॉक्टरों के मुताबिक आमतौर पर 4000 बच्चों में से एक में ऐसे मामले सामने आते हैं। ऐसे मामलों में की सबसे ज्यादा जटिलता मस्से का बड़ा और वजनी होना होता है। रमन के मामले में सर्जरी के जरिये इस दूर किया गया।
बताते चलें कि बच्चे के पिता सुदेव घोष संविदा पर ग्रांड ड्यूटी असिस्टेंट (जीडीए) का काम करते हैं और उनकी मां सुपर्णा घोष घरेलू सहायक के तौर पर काम करती हैं।