इस प्रदर्शन में दिल्ली के एम्स, सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग अस्पताल, आरएमएल अस्पताल और अन्य केंद्रीय सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ विभिन्न संस्थानों के नर्सिंग अधिकारियों व छात्रों ने भी भाग लिया और अपना विरोध दर्ज कराया।
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नर्सिंग स्टाफ का 80:20 नियम के खिलाफ प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
नर्सिंग स्टाफ की भर्ती के दौरान 80:20 के नियम के खिलाफ एम्स, एनआईसी झज्जर सहित अन्य अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाया जो पूरे दिन ट्रेंड पर रहा।
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नर्सिंग स्टाफ का 80:20 नियम के खिलाफ प्रदर्शन
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नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि काम करने के मामले में महिला व पुरुष दोनों बराबर हैं। फिर नर्सिंग भर्ती में यह आरक्षण क्यों। नर्सिंग पदों में 80 फीसदी महिलाएं और 20 फीसदी पुरुष नर्स को भर्ती करने का नियम गलत है। यह अधिकारों का हनन है। नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। यह नियम लिंग आधारित भेदभाव को बढ़ावा देता है।
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नर्सिंग स्टाफ का 80:20 नियम के खिलाफ प्रदर्शन
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नर्सिंग स्टाफ की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सदस्य कनिष्क का कहना है कि सरकार भेदभाव रहित वातावरण की बात कहती है, लेकिन यह नियम सीधे तौर पर गलत है। इस नियम को लागू करके पुरुष वर्ग के साथ भेदभाव किया जा रहा है। जबकि यह वर्ग भी अस्पताल में बेहतर सुविधा देता है। इन नियम के लागू होने पर उनके कॅरिअर के अवसरों को कम कर रहा है। वहीं अन्य स्टाफ का कहना है कि 80:20 नियम रूढ़िवादी धारणा पर आधारित है कि नर्सिंग एक महिला प्रधान पेशा है। जबकि महिला पुरुष दोनों इस दिशा में बेहतर काम कर सकते हैं।
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नर्सिंग स्टाफ का 80:20 नियम के खिलाफ प्रदर्शन
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कई सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों ने जताया विरोध
इस प्रदर्शन में दिल्ली के एम्स, सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग अस्पताल, आरएमएल अस्पताल और अन्य केंद्रीय सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ विभिन्न संस्थानों के नर्सिंग अधिकारियों व छात्रों ने भी भाग लिया और अपना विरोध दर्ज कराया।