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पाक की गिरफ्त में रहे इन जांबाजों की कहानी है खौफनाक, पार कर दी थीं बर्बरता की सारी हदें

Thu, 28 Feb 2019 01:12 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
युद्ध में पकड़े जाने वाले सैनिकों के साथ बर्बरता करने के मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड हमेशा से खराब रहा है। आज देश में जिस तरह की स्थिति है उससे कारगिल युद्ध के समय तीन जांबाज अफसरों के साथ हुए हादसे याद आते हैं। हमारे कई जांबाजों के साथ पाकिस्तान बहुत ही घिनौना बर्ताव कर चुका है। पाकिस्तान की बर्बरता के तीन बड़े उदाहरण हैं स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा, कैप्टन सौरभ कालिया और फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता, हालांकि फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता वापस लौट आए थे। आगे पढ़ें इन अफसरों के साथ क्या हुआ, पूरी कहानी...
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कारगिल में घुसपैठ की सबसे पहले खबर देने वाले सौरभ कालिया, रुला देगी बर्बरता की दास्तां
1999 में कारगिल में पाकिस्तानियों की घुसपैठ का पता कैप्टन सौरभ कालिया और उनकी टीम ने लगाया था। इसके बाद पालमपुर के कैप्टन सौरभ कालिया का शव अपने अन्य पांच साथियों के साथ क्षत विक्षत हालत में मिला था। 15 मई 1999 को करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने उन्हें और उनके पांच साथियों को पकड़ लिया था। इसके बाद उन्हें खौफनाक यातनाएं दी थीं। पाक सेना ने जब भारत को शव सौंपा तो कैप्टन कालिया के शरीर के कई अंग कटे हुए और गायब थे। उनके दोनों कानों में गर्म सलाखें दागी गई। यातनाएं कितनी ज्यादा थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि पाकिस्तानियों ने उनकी आंखें तक फोड़ दी थीं। इसके अलावा गालों पर कीलें गाड़ी थीं। पाकिस्तान ने दावा किया था कि सौरभ का शव एक गड्ढे में मिला था और उसकी मौत सख्त मौसम की वजह से हुई।
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साथी को ढूंढने गए स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा
स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा जो विंग कमांडर अभिनंदन की तरह ही मिग 21 फाइटर जेट उड़ाते हुए पाकिस्तान सीमा में जा घुसे थे। दरअसल बात 27 मई 1999 की है। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना ऑपरेशन सफेद सागर लॉन्च किया था, जिसका मकसद एलओसी पर पाकिस्तानी सेना की स्थिति का पता लगाना था। वायुसेना की भटिंडा स्थित गोल्डन-एरोज स्क्वाड्रन में अजय आहूजा फ्लाइट कमांडर थे, सेना ने उन्हें जिम्मेदारी दी कि वह पाक सेना की स्थिति का जानकारी करेंगे। वह मिग-21 लेकर इस काम पर निकले लेकिन बीच में ही उन्हें जानकारी मिली कि फ्लाइट-लेफ्टिनेंट नचिकेता को अपना मिग-27 विमान आग लगने के कारण छोड़ना पड़ा। उन्हें पता चला कि नचिकेता पाकिस्तानी सीमा में हैं और वहां उन्हें खोजने जाना जोखिम भरा हो सकता है फिर भी वह अपने साथी का पता लगाने पाक सीमा में घुसे जब वह उसकी तलाश कर ही रहे थे कि एक बम गोला उनके प्लेन से टकराया जिससे उसमें आग लग गई। इसकी वजह से उन्हें पाकिस्तानी सीमा में उतरना पड़ा। 27 मई शाम साढ़े आठ बजे तक यह कंफर्म हो गया कि अजय आहूजा शहीद हो चुके हैं। जब पाकिस्तान ने उनका शव सौंपा तो पता चला कि उनकी मौत प्लेन से कूदने की वजह से नहीं बल्कि बहुत पास से गोली मारने से हुई थी। स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा को उनकी बहादुरी के लिए मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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8 दिन बाद नचिकेता आए वापस
1999 में कारगिल युद्ध के दौरान फ्लाइट लेफ्टिनेंट कमबमपति नचिकेता को पाकिस्तानी सेना ने बंदी बना लिया था। भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बाद उन्हें आठ दिन बाद छोड़ दिया गया था। 1999 में वह वायुसेना के नौवें स्क्वाड्रन जो कारगिल के बटालिक सेक्टर में है पर तैनात थे। नचिकेता को 17 हजार फीट की ऊंचाई से 80 एमएम राकेट दागने की जिम्मेदारी दी गई थी। 27 मई के दिन भारतीय वायुसेना दुश्मन की चौकियों पर मिग-27 से हमले कर रही थी। एक रॉकेट के हमले में नचिकेता के विमान का इंजन रुक गया जिस वजह से उन्हें पाकिस्तानी सीमा में पैराशूट लेकर उतरना पड़ा। उतरने के साथ ही उन्हें पाकिस्तानी सेना ने बंदी बना लिया और रावलपिंडी की जेल में असंख्य यातनाएं दींं। 8 दिन बाद 3 जून, 1999 को नचिकेता को पाकिस्तान में रेड क्रास को सौंप दिया गया और वह वाघा बार्डर के रास्ते भारत लौट आए। ग्रुप कैप्टन नचिकेता को वर्ष 2000 में वायुसेना पदक से सम्मानित किया गया था।
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