ट्विन टावर
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तकनीक वाटर फॉल इम्प्लोजन
दोनों टावर वाटर फॉल इम्प्लोजन तकनीक से गिराए गए। इससे पहले एक टावर को थोड़ा सा टेढ़ा भी किया गया, जिससे उसका मलबा नजदीकी टावरों तक न पहुंचे। रविवार विस्फोट होने के चार सेकेंड के भीतर पानी के झरने सरीखा दृश्य उभर आया। तभी इसे वाटर फॉल इम्प्लोजन तकनीक कहा गया। इसमें पहले बेसमेंट को ध्वस्त किया गया। इसके बाद ऊपर से नीचे एक-एक कर तल ढहते चले गए। पूरी इमारत सीधे बैठ गई। ध्वस्तीकरण ऐसा रहा कि बगल की नौ मीटर दूर के टावर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। वहीं, विस्फोटक के तौर पर सुपर पावर 90 क्लास-2 के 325 किलोग्राम का प्रयोग हुआ। सोलर कॉर्ड का प्रयोग हुआ, जो 8,400 मीटर, 5,000 मीटर, 3,900 मीटर और 46,000 मीटर रहे।
नॉन इलेक्ट्रिक डेटोनेटर का प्रयोग हुआ, जो कि क्लास 6 डिविजन-2 का रहा। यह 10990 की संख्या में रहे। पूरी प्रक्रिया में कुल 3,700 किग्रा विस्फोटकों का इस्तेमाल हुआ। दोनों टावरों में लगे विस्फोटकों को तारों से जोड़ा गया। इन तारों को ब्लैक बॉक्स से जोड़ा गया, जो कि 100 मीटर दूर रहा। इसके बाद कंट्रोल्ड ब्लास्ट किया गया। इस तकनीक की मदद से पहले सियान और उसके बाद एपेक्स टावर गिरा।