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Yuvraj Death: 'फोन नहीं, हेडलाइट की थी रोशनी, बचाव के लिए था 30 मिनट का समय'; अफसरों के अजब दावों से नया मोड़

Wed, 28 Jan 2026 01:00 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

ग्रेटर नोएडा में युवराज की मौत मामले की जांच कर रही टीम के सामने अफसरों ने अजीब दावे किए हैं। अफसरों ने एसआईटी से कहा कि फोन की नहीं, कार की हेडलाइट से रोशनी आ रही थी। इंजीनियर को बचाने के लिए आधे घंटे से कम समय था। 12:20 बजे के बाद युवराज की तरफ से कोई हरकत नहीं हुई थी।
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Noida Yuvraj death - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
ग्रेटर नोएडा में युवराज की मौत मामले की जांच कर रही एसआईटी के सामने अधिकारियों ने अजब दावे किए हैं। तीन सदस्यीय जांच टीम को दिए गए बयान और जवाब में अधिकारियों ने कहा कि वीडियो में अंत तक दिख रही रोशनी मोबाइल टार्च की नहीं युवराज के कार की थी। 

यहीं नहीं कॉल डिटेल का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया युवराज को बचाने के लिए पौने दो घंटे नहीं बल्कि आधे घंटे से भी कम का समय मिला था। वहीं युवराज के पिता और हादसे के चश्मदीदों ने अब तक बचाव के लिए पौने दो घंटे और मोबाइल टार्च जलाकर मदद मांगने की बात कही है।
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नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया - फोटो : अमर उजाला
एसआईटी ने जांच मंगलवार तक पूरी की
सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड का हवाला देकर यह दावा किया कि 12:20 बजे के बाद युवराज की तरफ से कोई हरकत नहीं हुई थी। एसआईटी ने जांच मंगलवार तक तकरीबन पूरी कर ली। 16 जनवरी को हादसे की जांच 20 जनवरी से शुरू हुई थी। जांच में एसआईटी ने मंगलवार को भी नोएडा प्राधिकरण से कुछ सवालों के जवाब मांगे।
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घटना स्थल पर युवराज की मौत को लेकर जॉच करने पहुंची एसआईटी की टीम - फोटो : अमर उजाला
यह जवाब स्पोर्ट्स सिटी के उस प्लाट पर प्राधिकरण के वर्क सर्कल 10 से पहले की गई कार्रवाई को लेकर है। वर्क सर्कल की तरफ से बताया गया था कि बिल्डर को भरे हुए पानी को लेकर नोटिस जारी किया गया था। इसके साथ होर्डिंग्स लगवाए गए थे जिन्हें हटवा दिया गया था। 

 

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नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया - फोटो : अमर उजाला
इस पर जुर्माना भी लगवाया गया था। इस पर प्राधिकरण की तरफ से भेजे गए जवाब में बताया गया है कि प्राधिकरण की बाह्य विज्ञापन पॉलिसी है। इसमें महज शुल्क जमा करवाकर और मंजूरी के बाद ही विज्ञापन की मंजूरी बाह्य विज्ञापन विभाग देता है। पानी निकलवाने के लिए पूर्व में की गई तैयारियों की जानकारी भी वर्क सर्कल की तरफ से दी गई है। 
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नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री कार्यालय में रिपोर्ट पहुंचने के बाद साफ होगी तस्वीर
हादसे की जांच एसआईटी ने तकरीबन पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस घटना को लेकर गंभीर हैं। पूर्व में मेरठ आने पर भी मुख्यमंत्री ने जांच दल के अधिकारियों से जांच को लेकर जानकारी ली थी। मंगलवार की शाम तक एसआईटी की तरफ से रिपोर्ट सौंपी जानी थी। 

 
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इंजीनियर युवराज का आखिरी वीडियो वायरल - फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट सौंपी गई या नहीं यह तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। अब आगे हादसे की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी होगी ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
यह कार्रवाई सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से संयुक्त तौर पर होगी या फिर अलग-अलग विभागों से शासन स्तर से होगी स्पष्ट नहीं है। जांच रिपोर्ट में एसआईटी की सिफारिशें इसको लेकर अहम रहने वाली हैं।
 
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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
डार्क स्पॉट में शामिल नहीं था मोड़
प्राधिकरण की तरफ से जवाब दिया गया है कि ये मोड़ सड़क सुरक्षा समिति की तरफ से डार्क स्पॉट के रूप में नहीं चिन्हित किया गया था। न ही इसकी सूचना दी गई थी। सड़क पर अंधेरे को लेकर विद्युत यांत्रिक विभाग की तरफ से जवाब दिया गया है कि कुछ दिन पहले ही वहां की स्ट्रीट लाइटें दुरुस्त करवाई गई थीं।

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इंजीनियर युवराज मेहता की स्मृति में शोक सभा - फोटो : अमर उजाला
आरोपियों की न्यायिक हिरासत दो फरवरी तक बढ़ाई गई
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर हादसे के मामले में मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले में एमजेड विजटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार की न्यायिक हिरासत 2 फरवरी तक वहीं लोटस ग्रीन रवि बंसल, सचिन करनवाल की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी तक बढ़ाई है। 

 

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युवराज को श्रद्धांजलि देते हुए - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अदालत ने सुनवाई के दौरान विवेचक को भी जमकर फटकार लगाई है। अगली बार पूरी तैयारी के साथ आने को कहा है। मामले में दोपहर 3 बजे के बाद रिमांड पर सुनवाई है। लोटस ग्रीन बिल्डर के आरोपी पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि गिरफ्तार किए गए आरोपी न तो कंपनी के डायरेक्ट, ना मुख्य कर्ताधर्ता है। 

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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो और पिता - फोटो : अमर उजाला
आरोपी छोटे कर्मचारी मुनीम है। आरोपी किसी उच्च पदों पर तैनात नहीं है। आरोपी वेतन पर काम करते हैं। इन्हें पुलिस की ओर से जल्दबाजी में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बस ऊपर के अधिकारियों का दबाव और बिना जांच पड़ताल के आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। 
 
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नोएडा के सेक्टर -150 स्थित गड्ढे में जहां कार गिरी थी उसके दूसरी तरफ भी नहीं है कोई बैरिकेड - फोटो : अमर उजाला
आरोपियों को महज पुलिस और प्रशासनिक दबाव के कारण ऊपर के अधिकारियों के कहने पर जेल भेजा गया है। इस मामले में कंपनी की ओर से अदालत को 500 पेज की रिपोर्ट भी दी गई है। बावजूद जल्दबाजी में पुलिस की ओर से निर्णय लेकर गिरफ्तारी की गई।

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