ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत मामले में चश्मदीदों और जिम्मेदारों के बयानों का अंतर अफसरों पर भारी पड़ सकता है। एसआईटी की टीम ने दो दिन में 150 लोगों से पूछताछ की गई है। अधिकारी और कर्मचारी के बयान भी अलग हैं।
शासन की ओर से गठित एसआईटी की टीम ने दो दिन में तकरीबन 150 लोगों ने बयान दर्ज किए। इनमें घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद, पुलिस, प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे। इस दौरान अधिकारियों, कर्मचारियों और चश्मदीदों के बयान में काफी अंतर दिखा। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम पर हुई कार्रवाई के बाद अब अफसरों और कर्मचारियों की बारी है।
सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में लगातार चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। युवराज की जान न बचा पाने से व्यवस्था की खूब फजीहत हुई थी। इसके बाद युवराज की छवि धूमिल करने की कोशिश ने रही सही कसर पूरी कर दी।
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युवराज को श्रद्धांजलि देते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद एसआईटी ने जब प्रशासन, पुलिस और प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए तो सब साफ हो गया। तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर विभागीय अफसरों की लापरवाही स्पष्ट हो गई।
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युवराज को श्रद्धांजलि देते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बयानों में अंतर होने से अब लापरवाह अफसर और कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में दिखने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी दो से तीन दिनों में पूरी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। इसके बाद कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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दिवंगत युवराज मेहता के परिजनों से मिलते दादरी विधायक
- फोटो : X @tejpalnagarMLA
दो बार हुए बयान, दोनों अलग
एसआईटी ने शुक्रवार को 125 लोगों के बयान दर्ज किए। इसमें जिला प्रशासन, प्राधिकरण और पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी के साथ चश्मदीद शामिल थे। सभी के बयान में काफी अंतर दिखने पर दोबारा बयान दर्ज कराए गए।
कौन-कौन कार्रवाई के दायरे में
पानी में डूबी कार की छत पर बैठे युवराज दो घंटे तक मदद की गुहार लगाते रहे। सामने मौजूद पुलिस बल, अग्निशमन दल, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान तमाशबीन बने युवराज को पानी में डूबते हुए देखते रहे। शुरुआती चरण में जरूरी उपकरण पास न होने का हवाला भी दिया गया, तैराकी न जानने, रस्सी न होने जैसे तर्क भी सामने आए थे।
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घटना स्थल पर युवराज की मौत को लेकर जॉच करने पहुंची एसआईटी की टीम
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद घटना के समय के वीडियो भी सामने आए, जिसमें दिखाई दिया कि बचाव दल ने खासा प्रयास नहीं किए। पर्याप्त इंतजाम होने के बाद भी युवराज को बचाया नहीं गया। बार-बार पानी में उतरकर दोबारा वापस चढ़ते हुए बचाव दल के सदस्यों को वीडियो में देखा गया।
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डिलीवरी बॉय मोनिंदर
- फोटो : अमर उजाला
चार घंटे बैठाया, कई बार पूछे समान सवाल
युवराज की जान बचाने का प्रयास करने वाले मोनिंद्र को भी शनिवार को सेक्टर 6 स्थित नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय में बुलाया गया। जहां चार घंटे सामने बैठाकर एक ही सवाल कई बार पूछा गया। मोनिंद्र का कहना है कि एसआईटी टीम ने घटनास्थल पहुंचने और मौके पर मौजूद सुरक्षा बल के बारे में भी जानकारी ली।
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नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया
- फोटो : अमर उजाला
पांच दिन की एसआईटी जांच शनिवार को पूरी हो गई। इस दौरान 150 लोगों के बयान दर्ज किए गए। चश्मदीदों में प्रमुख रहे मोनिंद्र के भी बयान दर्ज हुए। मोनिंद्र के मुताबिक पूछताछ के दौरान उन्हें चार घंटे बैठाया गया। घटनास्थल पर पहुंचने का समय, मौके की स्थिति, घटनास्थल पर कितने सुरक्षा बल मौजूद थे, किस समय युवराज को निकाला गया, जैसे सवाल किए गए।
नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया
- फोटो : अमर उजाला
कितनी बार जेल जाने का सवाल भी किया गया। पारिवारिक मामला बताते हुए एक बार भी जेल न जाने का जवाब मोनेंद्र ने दिया। मोनेंद्र का कहना है कि परिवार की सुरक्षा की मांग की बात भी एसआईटी के समक्ष उठाई गई लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला।