नोएडा के सेक्टर-66 मामूरा में बुधवार को पांच मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से एक युवती समेत दो लोग जिंदा जल गए। सौ से ज्यादा लोगों को बचाया गया। जिस इमारत में आग लगी वह पांच फीट से भी कम चौड़ी गली में बनी है। नियम और मानक की परवाह के बगैर बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर की गई। अवैध इमारतों में न फायर एनओसी, न ही जीवन रक्षा के इंतजाम हैं।
नोएडा के सेक्टर-66 मामूरा में बुधवार को जिस पांच मंजिला इमारत में भीषण आग लगी, वह पांच फीट से भी कम चौड़ी गली में बनी है। यहां अवैध निर्माण कर ऐसी अनगिनत इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। अकेले मामूरा ही नहीं नोएडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी 81 गांवों में अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है।
इसे रोकने और भवन नियमावली को प्रभावी ढंग से लागू कर सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण की है, लेकिन प्राधिकरण इसमें नाकाम साबित हो रहा है। नतीजतन, गांवों में बिना किसी सुरक्षा मानक के धड़ल्ले से पीजी, बाजार और फ्लैट्स बनाए जा रहे हैं।
आबादी और रोजगार के बढ़ते दबाव के कारण मकान मालिकों को इनसे मोटा किराया तो मिल जाता है लेकिन इन इमारतों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होते। वहीं, पूरे मामले पर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी अपना पल्ला झाड़ते हुए बस यही कहते हैं कि गांवों में इमारत बनाने से पहले कोई नक्शा पास कराने ही नहीं आता।
विज्ञापन
2 of 12
नोएडा के पीजी में लगी आग में जले वाहन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्राधिकरण गांवों की जमीन को चिह्नित कर उसे स्थानीय निवासियों की आवासीय जरूरतों के लिए छोड़ता है। इन गांवों के आसपास विकसित सेक्टर हैं, जहां प्लॉट आवंटन के बाद सख्त नियमों और नक्शा पास कराकर ही निर्माण की अनुमति होती है। शहर के औद्योगिक विकास के साथ ही यहां रहने वाले कामकाजी लोगों की मांग तेजी से बढ़ी है।
विज्ञापन
3 of 12
नोएडा के पीजी में लगी आग में जले वाहन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सेक्टरों और सोसायटियों में किराया व संपत्तियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में गांवों के जमीन मालिक बहुमंजिला इमारतें बनाकर उन्हें किराये पर उठा रहे हैं। इस खेल में बिल्डर भी सक्रिय हो गए हैं, जो अवैध अपार्टमेंट बनाकर धड़ल्ले से फ्लैट बेच रहे हैं।
4 of 12
नोएडा के पीजी में लगी आग में जले वाहन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मोटी कमाई के लालच में गांवों की आबादी वाली जमीन पर बिना किसी नियम के पीजी, गेस्ट हाउस और होटलों का जाल बिछ गया है, जिनका एकमात्र लक्ष्य सिर्फ मुनाफा कमाना है।
विज्ञापन
5 of 12
नोएडा के पीजी में लगी आग, मौके पर जमा भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांवों के लिए 2010 में बनी थी भवन नियमावली, पर एक भी नक्शा पास नहीं हुआ
प्राधिकरण ने अपने क्षेत्र के गांवों के लिए साल 2010 में एक ''भवन नियमावली'' तैयार की थी। इसके तहत गांवों में केवल तीन मंजिल तक निर्माण की मंजूरी थी और सेटबैक (इमारत के चारों तरफ खाली जगह) समेत अन्य नियमों का पालन करना अनिवार्य था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज तक किसी भी गांव से एक भी नक्शा पास नहीं कराया गया।
विज्ञापन
6 of 12
नोएडा के पीजी में लगी आग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्राधिकरण अधिकारियों का तर्क है कि कोई खुद नक्शा पास कराने आगे नहीं आता। इससे पहले जब जिला पंचायत के पास नक्शा पास करने का अधिकार था, तब भी अपवादों को छोड़कर गांवों में नक्शे पास नहीं कराए गए।
विज्ञापन
7 of 12
नोएडा के पीजी में लगी आग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अब शासन स्तर से जिले के तीनों प्राधिकरण क्षेत्रों के गांवों के लिए नई भवन नियमावली तैयार करने की कवायद चल रही है, लेकिन जानकारों का कहना है कि जब तक यह नई नियमावली लागू होगी, तब तक इन गांवों में नए निर्माण के लिए जगह ही नहीं बचेगी।
8 of 12
मृतक ऋषभ की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अवैध इमारतों में न फायर एनओसी, न ही जीवन रक्षा के इंतजाम
यदि नोएडा प्राधिकरण किसी बहुमंजिला आवासीय इमारत का नक्शा पास करता है, तो कई मानकों की जांच की जाती है। अग्निशमन विभाग इन सभी मानकों की बारीकी से जांच करने के बाद ही एनओसी जारी करता है। गांवों में बनी अवैध इमारतों के फ्लैटों में बाहर से चमक-धमक तो दिखती है, लेकिन जीवन रक्षा के इन बुनियादी मानकों का पूरी तरह अभाव होता है।
पहुंच मार्ग: आपातकालीन स्थिति (जैसे आग लगना) के लिए इमारत तक जाने का रास्ता देखा जाता है।
सेटबैक की गणना: दमकल की गाड़ियां इमारत के चारों तरफ घूम सकें, इसके लिए पर्याप्त जगह छोड़ी जाती है।
आपातकालीन निकास: इमारत में एंट्री-एग्जिट के अलावा एक अतिरिक्त सुरक्षित निकास द्वार होना अनिवार्य है।
लिफ्ट सुरक्षा: लिफ्ट के संचालन के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय से एनओसी लेनी होती है।
फायर फाइटिंग सिस्टम: हर फ्लोर पर ''फायर हाइड्रेंट'' और ''होज पाइप'' लगाना जरूरी है, ताकि आग लगने पर पानी के तेज प्रेशर से उसे बुझाया जा सके।
10 of 12
नोएडा के पीजी में आग लगने के बाद सीढ़ी से दूसरी मंजिल पर पहुंचे लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मॉल से लेकर अपार्टमेंट तक; सब कुछ अवैध!
बिना नक्शा पास कराए शहर में सिर्फ फ्लैट ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स भी खड़े हो चुके हैं। सेक्टर-104 इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां कई अवैध शोरूम और बाजार चल रहे हैं। इसके अलावा बरौला, हाजीपुर, सलारपुर खादर, सर्फाबाद, गिझोड़, होशियारपुर, रायपुर, नंगली-वाजिदपुर और कम्बख्शपुर जैसे गांवों में तेजी से अवैध अपार्टमेंट बनाए जा रहे हैं।
11 of 12
नोएडा के पीजी में आग लगने के बाद सीढ़ी से दूसरी मंजिल पर पहुंचे लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अकेले सलारपुर खादर में ही बिल्डरों ने सैकड़ों अवैध अपार्टमेंट बनाकर हजारों फ्लैट बेच दिए हैं। ये सभी निर्माण बिना किसी सुरक्षा मानक के किए जा रहे हैं। यदि यहां कभी कोई बड़ी आगजनी या भूकंप जैसी आपदा आती है, तो हजारों लोगों की जान सीधे खतरे में पड़ जाएगी। हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब कुछ प्राधिकरण की नाक के नीचे खुलेआम हो रहा है।
नोएडा के पीजी में लगी आग, काबू पाते हुए दमकलकर्मी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्राधिकरण क्षेत्र के गांवों के लिए भवन नियमावली 2010 में बनाई गई थी। अब शासन स्तर से नई नियमावली तैयार की जा रही है। अवैध निर्माण को रुकवाने के लिए प्राधिकरण समय-समय पर नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण (तोड़फोड़) की कार्रवाई करता रहता है।"- सतीश पाल, एसीईओ, नोएडा प्राधिकरण