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UP: 'कैब चालक के हाथ जोड़े...घटनास्थल ढूंढने में लगे 40 मिनट'; पिता ने बताया युवराज दफ्तर से देर से क्यों आया?

Tue, 20 Jan 2026 12:02 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ग्रेटर नोएडा में सड़क हादसे में मारे गए युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने सोमवार को कहा कि बेटा आमतौर पर 10 बजे रात तक घर आ जाता था। मगर घटना की रात उसे आने में देर हुई थी। जब पिता ने उससे देरी का कारण पूछा तो उसने कहा था कि दफ्तर में काम अधिक है। इस कारण आने में देरी हो जाएगी।
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Noida Accident - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी निवासी युवराज की जिस गड्ढे में कार सहित डूबने से मौत हुई। वहां तीसरे दिन सोमवार को दोपहर में करीब एक बजे मीडिया और स्थानीय लोगों का तांता लगा रहा। सबकी जुबां एक ही सवाल था आखिर युवराज को किसने मारा? नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही या कुछ और? युवराज की मौत के दोषियों को सजा मिले।

मौके पर मौजूद आशुतोष सिंह का गुस्सा साफ दिखा। उनका कहना है कि रात के समय यहां अंधेरा छा जाता है। अगर एक क्षण को भी आप चूके तो सीधे गड्ढे में होंगे। यह अकेला ऐसा जानलेवा स्पॉट नहीं है। ऐसे कई गड्ढे और बेसमेंट हैं। इनकी बैरिकेड तक करना जरूरी नहीं समझा गया है। बमुश्किल 500 मीटर की दूरी पर ही ऐसा एक और गड्ढा वाकई दिखाई भी दिया जोकि एटीएस की सोसाइटी के पास में है।
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नोएडा के सेक्टर-150 में हुए हादसे के बाद घटना स्थल पर लगाए गए बैरियर - फोटो : अमर उजाला
बैनर पर सीईओ
टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के दोनों गेट पर रेजीडेंट्स ने दो युवराज को न्याय दिलाने के लिए बैनर लगा हैं। नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ लोकेश एम की फोटो भी बैनरों पर साफ दिखी। स्थानीय लोगों का शायद मानना है कि युवराज की मौत की वजह नोएडा प्राधिकरण ही है।
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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो और पिता - फोटो : अमर उजाला
पिता बोले- दफ्तर में काम अधिक होने के कारण घर लौटने में हुई देरी
उधर, युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने सोमवार को कहा कि बेटा आमतौर पर 10 बजे रात तक घर आ जाता था। मगर घटना की रात उसे आने में देर हुई थी। जब पिता ने उससे देरी का कारण पूछा तो उसने कहा था कि दफ्तर में काम अधिक है। इस कारण आने में देरी हो जाएगी। इस कारण पिता निश्चिंत थे। 

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इंजीनियर युवराज के पिता का दर्द - फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार रात करीब 12 बजे युवराज ने अपने पिता को फोन किया कि वह नाले में गिर गया है। उसे बचाओ। इतना सुनते ही उसको बचाने के लिए पिता जिस हालत में थे। वह दौड़ पड़े, उन्होंने पहले नीचे पहुंचकर अपनी स्कूटी उठाई मगर सर्दी के कारण वह स्टॉर्ट नहीं हुई।
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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सोसाइटी के बाहर मिली थी कैब, घटनास्थल ढूंढने में लगा 30 से 40 मिनट का वक्त
राजकुमार जब सोसाइटी के बाहर आए तो एक कैब मिल गई। पिता ने कैब चालक से हाथ जोड़ा कि वह नाले के पास ले चले। उसने युवराज के पिता बिठाया। वह पहले गलती से एस सिटी के पास एक बड़े नाले के पास गए। मगर युवराज वहां नहीं था। 
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कार समेत डूब गया सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज - फोटो : अमर उजाला
दोबारा फोन किया तो उसने बताया कि वह सोसाइटी के पास वाले नाले में गिरा है। इस दौरान उसके पास पहुंचने में करीब 30-40 मिनट लग गए। जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि युवराज गाड़ी से निकलकर बाहर आया और हिम्मत करके छत पर लेट गया था। वहां से वह मदद-मददर चिल्ला रहा था। जिससे राह चलता आदमी उसकी मदद कर पाए। इसके बाद उन्होंने डायल-112 पर फोन किया।
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नोएडा के सेक्टर-150 में हुए हादसे में टूटी पड़ी नाले की दीवार - फोटो : अमर उजाला
नहीं निकाली जा सकी कार
हादसे के तीन बाद भी युवराज की कार अभी भी बेसमेंट के उसी गड्ढे में फंसी हुई है। बेसमेंट जमा पानी का स्तर बढ़ने के बजाए घट रहा है। वहीं मामले में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, दमकल ने पानी में डूबी कार को निकालने से मना कर दिया है। सभी विभागों का कहना है कि उनका काम व्यक्ति को बचाना है। डूबी हुई कार को निकालना नहीं। 

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नोएडा के सेक्टर-150 में हुई कार दुर्घटना के बाद मौके पर जुटी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
इसकी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस की है। नोएडा प्राधिकरण द्वारा पहले बेसमेंट और गड्ढे से पानी निकालने के लिए पंप लगाए जाने की तैयारी की जा रही है। पानी पूरी तरह निकलने के बाद कार बाहर निकाली जाएगी। पुलिस की ओर से नोएडा प्राधिकरण नालों से आ रहे पानी को बंद कराने की बात कही गई है।

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नोएडा के सेक्टर-150 में दुर्घटना ग्रस्त कार सवार को निकालने के लिए जाती एसडीआरएफ की टीम - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय लोगों में दिखा आक्रोश
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। निवासी और स्थानीय गांव के लोग जब भी घटना स्थल के पास निकलते हैं तो वह प्राधिकरण के साथ जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं। निवासियों का कहना है कि समय रहते अगर बैरिकेड, रिफ्लेक्टर और खाली प्लॉट को टीन शेड से ढंकने का प्रयास किया गया तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर को अपनी जान से बाथ नहीं धोना पड़ता।

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एसडीएम सदर आशुतोष गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
एसडीएम सदर मीडिया के सवालों से बचते दिखे
सेक्टर-150 स्थित घटना की जानकारी के लिए सोमवार को एसडीएम सदर आशुतोष गुप्ता भी पहुंचे। मीडियाकर्मियों ने उनसे लापरवाही के संबंंध में सवाल किया गया तो उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि मामले की जांच की जा रही है।

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Noida Accident - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पिता ने हरिद्वार जाकर किया अस्थि विसर्जन
युवराज मेहता के पिता ने सोमवार को हरिद्वार जाकर अस्थि विसर्जन किया। इस दौरान उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। पिता का कहना है कि मामले में लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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नोएडा के सेक्टर -150 स्थित गड्ढे में जहां कार गिरी थी उसके दूसरी तरफ भी नहीं है कोई बैरिकेड - फोटो : अमर उजाला
बिल्डर कंपनी को नोटिस जारी करने की तैयारी
पिता की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस की ओर से बिल्डर कंपनी के जिम्मेदारों से पूछताछ की तैयारी शुरू कर दी गई है। पुलिस की ओर से जल्द ही दोनों बिल्डर कंपनी को नोटिस जारी किया जाएगा। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने रविवार को दो बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन व लोटस ग्रीन खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

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Noida Accident - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पुलिस ने मामले युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर बिल्डर के खिलाफ बीएनएस की धारा-105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (1) (किसी व्यक्ति के द्वारा की गई लापरवाही या जल्दबाजी से किसी व्यक्ति की मृत्यु, धारा-125 (मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने) की धाराओं में केस दर्ज किया है। 

 
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नोएडा सॉफ्टवेयर इंजीनियर मौत केस - फोटो : अमर उजाला
यह प्लॉट सेक्टर-150 के एमजेड विशटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड का है। जमीन लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड की थी। जहां लगभग 50 फुट गहरा गड्डा खोदा गया था। उसमें पानी था। प्लॉट पर कोई बैरिकेडिंग व रिफ्लेक्टर नहीं था। जिसके कारण यह घटना हुई। एमजेड विशटाउन प्लॉनर और डेवलपर आर्टच डेवलपर की ओर से गंभीर लापरवाही हुई है।

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