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13 अप्रैल से नवरात्र आरंभ : जानिए क्या है कलश स्थापना का मुहूर्त और मंत्रों के साथ पूजन विधि, कैसे मिलेगा लाभ

Mon, 12 Apr 2021 09:48 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
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- फोटो : amar ujala
चैत्र नवरात्र पर आदिशक्ति मां दुर्गा के आह्वान की तैयारी शुरू हो गई हैं। मंगलवार से शुरू हो रहे नवरात्र के दौरान भक्त मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं। नौ दिन माता रानी की कृपा पाने के लिए अलग-अलग रंग के वस्त्र पहनकर सच्चे मन से आराधना करते हैं। मंदिरों में नवरात्र के दौरान विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान होते हैं। हालांकि, कोरोना के कारण इस बार मंदिरों में एक साथ सीमित संख्या में भक्त माता रानी के दर्शन कर पाएंगे। भक्तों का कहना है कि माता से कोरोना से मुक्ति की प्रार्थना करेंगे।

कोरोना संक्रमण का असर नवरात्र पर भी देखने को मिलेगा। मंदिर प्रबंधकों की तरफ से भक्तों से अपील की गई है कि वो मंदिर परिसर में भीड़ नहीं करें। घर में ही पूजा करने का प्रयास करें। कई मंदिरों की तरफ से भी ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था की गई है, ताकि भक्त घर बैठे मंदिर में पूजा करा सकें। इस बार फेसबुक पर पूजा का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा। आगे जानिए कलश स्थापना का मुहूर्त और मंत्रों के साथ में क्या है पूजा विधि....
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नवरात्र के लिए पूजा-व्रत सामग्री की खरीदारी शुरू - फोटो : अमर उजाला
पंडित प्रकाश जोशी ने बताया कि चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल यानी मंगलवार से शुरू हो रहे हैं।
13 अप्रैल- प्रतिपदा - मां शैलपुत्री और घट स्थापना 
14 अप्रैल- द्वितीया - मां ब्रह्मचारिणी 
15 अप्रैल- तृतीया - मां चंद्रघंटा 
16 अप्रैल- चतुर्थी - मां कूष्मांडा 
17 अप्रैल- पंचमी - मां स्कंदमाता 
18 अप्रैल- षष्ठी - मां कात्यायनी 
19 अप्रैल- सप्तमी - मां कालरात्रि
20 अप्रैल- अष्टमी - मां महागौरी 
21 अप्रैल- नवमी - मां सिद्धिदात्री, रामनवमी 
22 अप्रैल- दशमी - व्रत पारण 
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kalash - फोटो : social media
कलश स्थापना मुहूर्त - 13 अप्रैल को सुबह 5:45 से 9:59 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त पूर्वाह्न 11: 41 से 12:32 तक है। 

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ब्रह्मचारिणी। - फोटो : अमर उजाला
कलश स्थापना का मंत्र-

ओम अपाम पतये वरुणाय नम:

मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने के लिए 4 विशेष मंत्र 

1- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। 

2- ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। 

3- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 

4- नवार्ण मंत्र - ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै
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navratri - फोटो : amar ujala
स्थापना के लिए खरीद रहे मूर्ति व कलश
नवरात्र के पहले दिन घरों में मूर्ति स्थापना की जाती है। ऐसे में भक्त बाजारों से मां की मूर्ति खरीद रहे हैं, ताकि मुहूर्त पर घर में विधि-विधान से माता की स्थापना कर सकें। बाजारों में सुंदर-सुंदर मूर्तियां जो ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं।

हर दिन माता रानी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान वस्त्रों के रंगों का भी विशेष महत्व होता है। मेरी कोशिश रहती है कि मां का पसंदीदा रंग को पहनूं।- मीनाक्षी नागर, डेल्टा टू 

माता रानी सभी की इच्छाएं पूरी करती हैं। नवरात्र के नौ दिन सकारात्मक ऊर्जा लेकर आते हैं। मां से कामना करूंगी कि कोरोना से मुक्ति दिलाएं।- अनीता भाटी, बीटा वन
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