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एक वर्ष से अधिक समय से वायरस में लगातार बदलाव हुए, लेकिन यह घातक नहीं था। मार्च के बाद बदलाव से मरीज की शरीर की एंटीबॉडी उसे ठीक तरह से पहचान नहीं पा रही और वायरस फेफड़े की कोशिकाओं को तेजी से संक्रमित कर रहा है। इस वजह से वायरस अधिक घातक हो रहा है। वहीं, जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता और रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि का कहना है कि जिन लोगों को वैक्सीन लगी है, उनकी भी एंटीबॉडी को वायरस स्वरूप में बदलाव से धोखा देकर संक्रमित कर रहा है। हालांकि, वैक्सीन की एंटीबॉडी बाद में इसके असर को कम करती है।